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कयास : नीतीश कुमार विधानसभा भंग करने के लिए ले रहे हैं कानूनी सलाह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. सूत्रों के मुताबिक खबर है कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) जल्द बिहार विधानसभा को भंग (Bihar Assembly Dissolve) कर सकते हैं. इसके लिए वह कानूनी सलाह ले रहे हैं. जेडीयू और आरजेडी के बीच जारी तनातनी के बीच ये बड़ी खबर आई है. नीतीश कुमार जल्द ही कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं. सूत्रों के हवाले से ये भी खबर है कि बीजेपी का रुख पॉजिटिव नहीं है. इसी के चलते नीतीश कुमार विधानसभा भंग कर सकते हैं. वह लीगल ऑप्शन पर सलाह ले रहे हैं.

टूट जाएगा JDU-RJD का गठबंधन?

इस बीच, बिहार की पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने कहा कि जेडीयू के लोग आरजेडी से अपना संबंध तोड़ेंगे. 25 जनवरी के बाद बिहार में खेला होना तय है. यह गठबंधन चलने वाला नहीं है. दोनों पार्टियों के बीच तनातनी तो चल ही रही है. दोनों विपरीत विचारधारा की पार्टियां हैं. हालांकि, मुझे ये नहीं पता है कि जेडीयू का क्या होगा? बीजेपी का साथ उसे मिलेगा या नहीं.

JDU-BJP साथ आएंगे या नहीं?

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वहीं, बिहार की पूर्व डिप्टी सीएम रेणु देवी ने कहा कि बीजेपी के लिए जेडीयू के रास्ते खुले हैं. हालांकि, जेडीयू और आरजेडी का गठबंधन ज्यादा दिन तक चलने वाला नहीं है. जब ये गठबंधन बना था, तभी हमें पता था कि यह टूटेगा. बीजेपी तो हमेशा से गरीब-गुरबों की पार्टी है. प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने हमेशा गरीबों के लिए काम किया है. लालू की पार्टी परिवारवादी है. नीतीश ने जब परिवारवाद पर हमला किया तो उन्हें चिढ़ना नहीं चाहिए.

विधानसभा भंग हुई तो क्या होगा?

गौरतलब है कि अगर बिहार विधानसभा भंग हो जाती है और बीजेपी का साथ जेडीयू को नहीं मिलता है तो जल्द विधानसभा चुनाव भी हो सकते हैं. माना जा रहा है कि अगर ऐसा हुआ तो कहीं लोकसभा और विधानसभा के चुनाव बिहार में एक साथ ना हो जाएं. हालांकि, नीतीश कुमार और लालू की पार्टी आरजेडी में बढ़ती खटास के बीच विधानसभा का भंग होना लगभग तय माना जा रहा है.

साभार : जी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।