लोड हो रहा है...

स्वामी प्रसाद मौर्य बनाएंगे नया राजनीतिक दल, जल्द होगी घोषणा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद अब स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) नई पार्टी बनाने की योजना बना रहे हैं. अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से मनमुटाव के बाद उन्होंने इसके संकेत के दिए हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य अपने समर्थकों के साथ 22 फरवरी को नए राजनीतिक संगठन या पार्टी का ऐलान कर सकते हैं.

मौर्य ने कहा, “मैं समाजवादी पार्टी में हूं या नहीं… ये बात उनपर भी निर्भर होता है. ताली दोनों हाथों से बजती है. एक हाथ से नहीं.” अगर अखिलेश यादव बात करेंगे, तो पार्टी में रह लेंगे? इसपर मौर्य कहते हैं, “अभी बहुत देर हो गई है. अभी निर्णय कार्यकर्ताओं पर छोड़ दिया है.” स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक इंटरव्यू में कहा, “मैंने 13 फरवरी को सपा से इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफे में मैंने अपनी बातें बहुत साफ तरीके से लिखीं. इस्तीफा भेजे एक हफ्ता हो गया. राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बारे में बात ही नहीं की. स्वभाविक रूप से अब मैंने कार्यकर्ताओं पर छोड़ दिया है.”

नई पार्टी का क्या नाम रखेंगे? इसके जवाब में मौर्य ने कहा, “नाम अभी तय नहीं है. पार्टी कार्यकर्ता तय कर लेंगे… जो भी होगा, 22 तारीख (फरवरी) को बता दूंगा.” अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर लाभ लेने का आरोप लगाया है. इसे लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में मौर्य ने कहा, “भला अखिलेश यादव ने मुझे कौन सा लाभ दे दिया… मैंने उन्हें लाभ दिया है. मेरे आने से उनका वोट करीब 6 फीसदी बढ़ा है. सत्ता में रहने पर भी इतना वोट नहीं पाए थे.”

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, “45 विधायक की उनकी हैसियत थी. उन्हें मैंने आज 110-11 विधायक दिए हैं. उन्होंने मुझे कुछ नहीं दिया. जो दिया भी है, उसमें मैंने अपमान ही झेला है. एक राष्ट्रीय महासचिव ऐसा भी है, जिसका बयान हमेशा पार्टी का होता है. एक महासचिव मैं था.. जिसका बयान हमेशा निजी हो जाता है. भेदभाव पूर्ण पद पर रहने का औचित्य क्या था?”

- Advertisement -

मौर्य इससे पहले 3 पार्टियां बदल चुके हैं. उन्होंने लोकदल से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की. इसके बाद वह बहुजन समाज पार्टी से जुड़े और करीब 20 साल उसी में रहे. बसपा के बाद उन्होंने 2020 में बीजेपी का हाथ थामा. फिर 2022 में बीजेपी को छोड़कर समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवार हो गए. स्वामी प्रसाद मौर्या 5 बार विधायक रह चुके हैं. 1996 में वह पहली बार विधायक बने थे. वह मायावती सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.

साभार : एनडीटीवी

भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

https://www।amazon.in/dp/9392581181/

https://www।flipkart.com/bharat-1857-se-1957-itihas-par-ek-drishti/p/itmcae8defbfefaf?pid=9789392581182

- Advertisement -

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।