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कश्मीर की ओर वापसी: ‘निर्वासन से उत्कृष्टता’ की ओर बढ़ते कश्मीरी हिंदुओं के कदम

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जम्मू | गुरुवार,  14 मई 2026

कश्मीर घाटी में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के बदलते परिवेश के बीच एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। दशकों के विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी हिंदू समुदाय ने अब अपनी जड़ों की ओर लौटने और अपनी विरासत को सहेजने के लिए एक निर्णायक कदम उठाया है।

ऐतिहासिक समागम: निर्वासन से उत्कृष्टता तक

आगामी 6 जून से 14 जून, 2026 तक कश्मीर घाटी में “निर्वासन से उत्कृष्टता तक— कश्मीरी हिंदुओं की संघर्ष, पुनर्जागरण और वापसी की यात्रा” थीम पर आधारित एक भव्य सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। डल झील के किनारे स्थित प्रतिष्ठित शेरे कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में होने वाला यह आयोजन विस्थापित समुदाय का घाटी में अपनी तरह का पहला सबसे बड़ा समागम है।

सम्मेलन के मुख्य आकर्षण और कार्यक्रम

यह नौ दिवसीय कार्यक्रम केवल एक बैठक नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का उत्सव है:

  • विरासत यात्रा (Heritage Tour): इसमें घाटी के उन प्राचीन मंदिरों, सांस्कृतिक स्थलों और ऐतिहासिक केंद्रों का भ्रमण शामिल होगा, जो कश्मीरी हिंदू सभ्यता के प्रतीक रहे हैं।

  • बौद्धिक सत्र: सम्मेलन में कश्मीरी पंडितों के भविष्य, विरासत संरक्षण और सामाजिक सामंजस्य पर राउंड-टेबल चर्चाएं और शैक्षणिक सत्र आयोजित किए जाएंगे।

  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: कश्मीरी भाषा, संगीत और लोक कलाओं के माध्यम से समुदाय की पहचान को प्रदर्शित किया जाएगा।

  • युवा संवाद: नई पीढ़ी को उनकी पैतृक भूमि से जोड़ने के लिए विशेष सत्र आयोजित होंगे।

वैश्विक भागीदारी और गणमान्य अतिथि

इस सम्मेलन का आयोजन ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा (GKPD), जम्मू-कश्मीर विचार मंच, और कश्मीरी ओवरसीज एसोसिएशन (USA) सहित लगभग 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय और भारतीय संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। इसमें अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व के देशों से भारी संख्या में प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

आयोजकों ने इस संवाद को समावेशी बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को आमंत्रित किया है। इसके साथ ही, कश्मीरी मुस्लिम और सिख नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी न्योता भेजा गया है।

निष्कर्ष

पिछली रिपोर्टों के विपरीत, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक नीति-निर्माण और भविष्य की रूपरेखा तैयार करने का मंच है। आयोजकों का उद्देश्य “द गरिमापूर्ण वापसी और समावेशी भविष्य” की नींव रखना है।

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