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कांग्रेस नेताओं के बयानों से नाराज चुनाव आयोग ने खरगे को पत्र लिख माँगा जवाब

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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चंडीगढ़. हरियाणा के चुनाव परिणाम पर कांग्रेस नेताओं की चुनाव आयोग पर की गई टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने नाराजगी जताई है. बुधवार को आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को इस संबंध में पत्र लिखा है. पत्र में आयोग ने कहा कि हरियाणा चुनाव के नतीजों को अस्वीकार्य बताने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बयान देश के समृद्ध लोकतांत्रिक इतिहास में पहले नहीं सुने गए हैं. ये बयान बोलने की स्वतंत्रता की वैधानिकता से भी परे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष खरगे को लिखे पत्र में आयोग ने कहा कि पार्टी के नेता जयराम रमेश और पवन खेड़ा की ऐसी टिप्पणियां वैधानिक और नियामक चुनावी ढांचे के अनुसार लोगों की इच्छा को अलोकतांत्रिक तरीके से खारिज करने जैसी हैं.

पत्र में आयोग ने कहा कि उसने खरगे और राहुल गांधी के बयानों पर भी गौर किया है, जिनमें हरियाणा के नतीजों को अनपेक्षित बताया गया है. पार्टी ने इसका विश्लेषण करने और अपनी शिकायतों के साथ निर्वाचन आयोग से संपर्क करने का प्रस्ताव रखा है. आयोग ने कहा कि कांग्रेस के 12 सदस्यीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की ओर से बैठक के लिए उससे समय मांगा गया है जिसमें परिणाम को अस्वीकार्य बताने वाले लोग भी शामिल हैं. आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष को लिखा पत्र में कहा है कि आयोग केवल पार्टी अध्यक्ष के बयान को अधिकारिक बयान मानती है. इसलिए वह चुनाव नतीजों पर पार्टी का रुख स्पष्ट करने का आग्रह करती है. निर्वाचन आयोग ने बुधवार शाम 6 बजे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल से मिलने पर सहमति जताई है.

कांग्रेस नेताओं ने क्या कहा

मंगलवार को नतीजे आने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए आरोप लगाया था कि हरियाणा के नतीजे बहुत अप्रत्याशित हैं और ये स्वीकार नहीं हैं. कई जिलों से गंभीर शिकायतें आई हैं. पवन खेड़ा ने कहा था कि उन्होंने जो ज़मीनी स्तर पर देखा नतीजे उसके उलट हैं. नतीजे भावनाओं के विपरीत हैं. नतीजों को तंत्र की जीत और लोकतंत्र की हार बताया था. पार्टी के नेता जयराम रमेश ने कहा था कि स्थानीय अधिकारियों पर दबाव था जिसके कारण उन्होंने सही से काम नहीं किआ. कई सीटें ऐसी थीं जहां हम हार नहीं सकते थे लेकिन वहां भी हम हार गए. चुनाव के नतीजों को अप्रत्याशित, आश्चर्यजनक और विरोधाभासी बताया था.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।