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मुझे हल्के में मत लो, जिसे समझना था और वह समझ भी गए : एकनाथ शिंदे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. मुझे हल्के में मत लो, तांगा पलट देंगे…महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने एक बार फिर अपने बयान को दोहराया है। शुक्रवार को उन्हें जब इस बारे में पूछा गया कि यह इशारा किसके लिए था तो उन्होंने ऐसा जवाब दिया कि जिसमें उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस दोनों के लिए चेतावनी नजर आई। उन्होंने कहा कि यह इशारा किसके लिए था, जिसे समझना था और वह समझ भी गए। हालांकि अपने बयान में उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट की ओर से महादजी सिंधिया अवॉर्ड को लेकर किए गए कमेंट का जिक्र किया, मगर यह इशारा एकतरफा नहीं था।

कई मोर्चों पर अभियान छेड़ा

दरअसल एकनाथ शिंदे महायुति की सरकार बनने के बाद ही कई मोर्चों पर अभियान छेड़ रखा है। एक तरफ उन्होंने उद्धव गुट में सेंध लगाने के लिए ऑपरेशन टाइगर की खुली घोषणा कर रखी है तो दूसरी तरफ आए दिन गठबंधन में उनकी नाराजगी की खबरें भी आती हैं। पिछले दिनों में भी वह सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों से दूर ही रहे।

‘मुझे हल्के में मत लीजिए’

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह मैंने पहले ही कहा है कि मुझे हल्के में मत लीजिए। मैं एक सामान्य पार्टी कार्यकर्ता हूं, मैं बाला साहेब और दीघे साहब का कार्यकर्ता हूं। सभी को मेरी बात इसी समझ से लेनी चाहिए। जब 2022 में मुझे हल्के में लिया तो तांगा पलट गया और मैंने सरकार बदल दी। इसके बाद हम आम लोगों की इच्छाओं की सरकार लाए। उन्होंने विधानसभा में अपने पहले भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 200 से ज्यादा सीटें मिलने की भविष्यवाणी की थी और गठबंधन को 232 सीटें आई हैं, इसलिए मुझे हल्के में मत लीजिए। शिंदे ने कहा कि जो लोग इस इशारे को समझना चाहते हैं, वे इसे समझ लें और मैं अपना काम करता रहूंगा।

शिंदे के निशाने पर कौन?

उद्धव गुट को निशाने पर लेते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि लोग आरोप लगा रहे हैं। महादजी शिंदे अवॉर्ड राष्ट्र गौरव पुरस्कार मुझे मिला, शरद पवार साहब ने यह सम्मान दिया फिर भी इसको लेकर जलन हुई। मेरी आलोचना के अलावा उद्धव ठाकरे ने सीएम बनवावे वाले शरद पवार और साहित्यकारों का अपमान किया गया। इस मामले में जबरन अमित शाह का नाम जोड़ा गया।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।