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अदालत ने प्रोफेसर अली खान को 7 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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चंडीगढ़. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर टिप्पणी करने के आरोपित अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को दो दिन की पुलिस रिमांड खत्म होने पर मंगलवार को जुडिशियल मजिस्ट्रेट आजाद सिंह की कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें सात दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस दौरान सरकारी वकील अनुज मलिक ने कोर्ट से रिमांड बढ़ाने की मांग की। सरकारी वकील ने तर्क दिया कि अभी प्रोफेसर अली का मोबाइल और लैपटॉप रिकवर किया गया है जिसे सील करने के बाद जांच के लिए पंचकूला भेजा गया है। इसकी जांच के लिए समय चाहिए। साथ ही प्रोफेसर अली और उनकी पत्नी का ओरिजिनल पासपोर्ट भी चाहिए जबकि उनके वकीलों की ओर से अभी फोटो कॉपी उपलब्ध करवाई है।

विदेश यात्राओं के बारे में करनी है पूछताछ- सरकारी वकील

सरकारी वकील ने आगे कहा कि प्रोफेसर अली खान ने 40 देशों की विदेश यात्राएं की हैं जिनके संबंध में पूछताछ करनी है। उनके मोबाइल से विदेश में कॉल की जाती रही है जिसका उत्तर भी मैच करना है उसकी भी जांच की जानी है। वहीं, प्रोफेसर अली खान की ओर से पेश हुए उनके वकील एडवोकेट कपिल देव और 10-12 अन्य वकीलों ने अपने तर्क रखे। उन्होंने कहा कि पुलिस 2 दिन में उनका मोबाइल और लैपटॉप रिकवर कर चुकी है।

अस्पताल में भर्ती हैं खान की पत्नी

पासपोर्ट और प्रोफेसर अली खान के दो बैंक खातों की डिटेल उनको उपलब्ध करवाई जा चुकी है। प्रोफेसर अली खान की पत्नी गर्भावस्था के अंतिम दौर में हैं। प्रोफेसर की पत्नी को देखभाल की जरूरत है। वह अस्पताल में भर्ती हैं, इसलिए रिमांड न बढ़ाई जाए। वकील कपिल देव ने कहा कि प्रोफेसर अली ने पासपोर्ट नंबर के आधार पर जो विदेश यात्राएं की हैं, उनकी डिटेल विदेश मंत्रालय की वेबसाइट से निकल सकती है। न्यायाधीश आजाद सिंह ने दोनों पक्षों के वकीलों के तर्क सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।