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शुभमन गिल अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए हैं, अभी भी दूसरे टेस्ट में खेलना मुश्किल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. भारतीय कप्तान शुभमन गिल को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए पहले टेस्ट के दौरान गर्दन की चोट के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। रविवार को बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने वुडलैंड्स मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल जाकर गिल से मुलाकात की। भारत को ईडन गार्डन्स की चुनौतीपूर्ण पिच पर 30 रन की हार का सामना करना पड़ा, जिसके साथ मेहमान टीम ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त ले ली।
दूसरे टेस्ट में खेलने पर संशय
गिल को मैच के दूसरे दिन बल्लेबाजी के दौरान चोट लगी थी। तीसरे दिन के खेल की शुरुआत से पहले ही उन्हें पहले टेस्ट से बाहर कर दिया गया था और वे दूसरी पारी में बल्लेबाजी के लिए भी उपलब्ध नहीं थे, जब भारतीय टीम 93 रन पर सिमट गई। टीम प्रबंधन ने गिल की फिटनेस पर नजर बनाए रखी है, लेकिन यह अभी तय नहीं है कि वे 22 नवंबर से गुवाहाटी में शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट में खेल पाएंगे या नहीं। भारतीय टीम मंगलवार को गुवाहाटी के लिए रवाना होगी।
पूरे दो सत्र भी नहीं टिक सकी भारतीय टीम
तीसरे दिन दक्षिण अफ्रीका की दूसरी पारी 153 रन पर ऑलआउट हुई थी और उसने 123 रनों की बढ़त लेकर भारत के सामने 124 रनों का लक्ष्य रखा था। भारत की बल्लेबाजी दूसरी पारी में बेहद खराब रही और टीम दूसरे ही सत्र में 93 रन पर ऑलआउट हो गई। भारत की बल्लेबाजी इस कदर खराब रही कि टीम के छह बल्लेबाज दहाई अंक तक भी नहीं पहुंच सके। भारतीय टीम के बल्लेबाज पूरे समय संघर्ष करते नजर आए और पूरे दो सत्र भी बल्लेबाजी नहीं कर सके।
2010 के बाद भारतीय जमीन पर द.अफ्रीका ने जीता टेस्ट
दक्षिण अफ्रीका के लिए इस टेस्ट मैच में जीत हासिल करना विशेष है। उसने इस मैच से पहले आखिरी बार भारतीय जमीन पर फरवरी 2010 में टेस्ट मैच जीता था। उस वक्त टीम ने भारत को पारी और छह रनों से हराया था। इसके बाद उसने भारत के खिलाफ भारत में आठ टेस्ट मैच खेले जिसमें से भारतीय टीम ने सात मैच जीते, जबकि एक ड्रॉ रहा। लेकिन बावुमा की अगुआई में दक्षिण अफ्रीका ने इस तिलिस्म को तोड़ा और 15 वर्षों का सूखा समाप्त करने में सफल रही।
साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।