लखनऊ | रविवार, 12 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश की आगरा पुलिस ने चर्चित अंतरराष्ट्रीय धर्मांतरण सिंडिकेट के खिलाफ अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य वित्तीय मददगार दाऊद अहमद के खिलाफ न केवल नया मुकदमा दर्ज किया है, बल्कि उसके भोपाल स्थित आवास पर कुर्की की मुनादी करते हुए नोटिस भी चस्पा कर दिया है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि यदि आरोपी जल्द ही आत्मसमर्पण नहीं करता, तो उसकी करोड़ों की संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
कनाडा और यूएई से जुड़ रहे हैं फंडिंग के तार
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस सिंडिकेट को चलाने के लिए भारी भरकम धनराशि विदेशों से भेजी जा रही थी। पुलिस के रडार पर विशेष रूप से कनाडा और यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) हैं।
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दाऊद अहमद की भूमिका: मूल रूप से भोपाल का रहने वाला दाऊद अहमद वर्तमान में कनाडा में रहकर इस पूरे फंडिंग नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा है।
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आयशा का कनेक्शन: गिरोह की एक अन्य अहम सदस्य आयशा उर्फ एसबी कृष्णा, जिसे गोवा से गिरफ्तार किया गया था, वह विदेशी धन के प्रबंधन और उसे सिंडिकेट के अन्य सदस्यों तक पहुँचाने का काम करती थी।
जुलाई 2025 में दो बहनों के गायब होने से हुई थी शुरुआत
इस बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ उस वक्त हुआ जब जुलाई 2025 में आगरा के सदर क्षेत्र से दो सगी बहनें रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गई थीं।
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सघन तलाशी: पुलिस ने सर्विलांस की मदद से दोनों युवतियों को कोलकाता से सुरक्षित बरामद किया।
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चौंकाने वाले बयान: युवतियों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण के लिए मजबूर किया गया था।
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गिरफ्तारी का सिलसिला: इसके बाद पुलिस ने कड़ियाँ जोड़ीं और अब तक 14 से अधिक आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
अब्दुल रहमान: हिंदू से मुस्लिम बनकर बना मास्टरमाइंड
पुलिस की फाइल में इस गिरोह का सबसे शातिर चेहरा अब्दुल रहमान कुरैशी है। जांच में पता चला कि उसका असली नाम महेंद्र पाल जादौन है। वह दिल्ली को अपना बेस बनाकर पूरे देश में धर्मांतरण का जाल बिछा रहा था। उसने अपना धर्म बदलकर न केवल पहचान छिपाई बल्कि कई युवतियों को अपने जाल में फंसाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का भी सहारा लिया।
BNS की धारा 209 के तहत नया शिकंजा
फरार दाऊद अहमद की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। आगरा के थाना सदर बाजार में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 209 के तहत धोखाधड़ी और साक्ष्यों को प्रभावित करने का मामला दर्ज किया गया है। भोपाल पुलिस के सहयोग से आगरा पुलिस ने उसके ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन उसके फरार होने के कारण अब ‘कुर्की’ (संपत्ति जब्ती) का रास्ता अपनाया जा रहा है।
जांच की रडार पर ‘आतंकी लिंक’
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश की एटीएस (ATS) और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं।
“जिस तरह से इस सिंडिकेट को विदेशी फंडिंग मिल रही है, उससे इसके तार अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़े होने की आशंका प्रबल हो गई है। हम हर उस बैंक ट्रांजेक्शन की जांच कर रहे हैं जो संदिग्ध देशों से भारत आया है।” — पुलिस सूत्र
कैसे फंसाता था यह गिरोह?
पुलिस ने इस गिरोह के काम करने के तरीके (Modus Operandi) को चार चरणों में डिकोड किया है:
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सॉफ्ट टारगेट: आर्थिक रूप से कमजोर या भावनात्मक रूप से अस्थिर युवतियों की पहचान।
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प्रलोभन: बेहतर भविष्य, नौकरी या विदेश में बसाने का लालच।
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ब्रेनवॉश: धार्मिक कट्टरता के जरिए मानसिक दबाव बनाना।
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कानूनी जाल: धर्मांतरण के बाद जबरन निकाह कराकर उन्हें वापस लौटने के रास्ते बंद करना।
फिलहाल, आगरा पुलिस दाऊद अहमद के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की भी तैयारी कर रही है ताकि उसे कनाडा से प्रत्यर्पित (Extradite) किया जा सके।
Matribhumisamachar


