जम्मू | मंगलवार, 28 अप्रैल 2026
श्रीनगर में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर लश्कर-ए-तैयबा के एक खतरनाक अंतरराज्यीय आतंकी मॉड्यूल की जांच का जिम्मा संभाल लिया है। यह मामला न केवल जम्मू-कश्मीर, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
मामले की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारियां
इस आतंकी नेटवर्क का खुलासा पिछले मार्च में जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के एक साझा ऑपरेशन में हुआ था। पुलिस ने पंजाब के मलेरकोटला से दो प्रमुख पाकिस्तानी आतंकियों, अबू हुरैरा उर्फ अब्दुल्ला और खुबैब को गिरफ्तार किया था। इनके साथ ही तीन स्थानीय मददगारों (Overground Workers – OGWs) मोहम्मद नकीब बट, आदिल राशिद और गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा को भी हिरासत में लिया गया है।
कोर्ट की कार्यवाही और रिमांड
सोमवार को एनआईए ने इन सभी पांचों आरोपियों को जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत में पेश किया। अदालत ने:
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पाकिस्तानी आतंकियों को 2 दिन की एनआईए रिमांड पर भेजा है।
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तीन स्थानीय मददगारों को 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
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16 वर्षों से सक्रिय: मुख्य आतंकी अबू हुरैरा पिछले 16 वर्षों से कश्मीर में आतंकी गतिविधियों का संचालन कर रहा था। वह 40 से अधिक विदेशी आतंकियों का हैंडलर रहा है।
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देशव्यापी नेटवर्क: यह मॉड्यूल केवल कश्मीर तक सीमित नहीं था, बल्कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी लश्कर का स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहा था।
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फर्जी पासपोर्ट का खेल: जांच में यह भी सामने आया है कि एक अन्य आतंकी उमर उर्फ खरगोश राजस्थान से फर्जी पासपोर्ट बनवाकर सऊदी अरब भागने में सफल रहा। एनआईए अब इस फर्जी पासपोर्ट रैकेट की भी जांच कर रही है।
नवीनतम जानकारी (Updates)
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सुरक्षा प्रोटोकॉल: पहले यह मामला केवल स्थानीय आतंकी गतिविधि माना जा रहा था, लेकिन इसके अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय (इंडोनेशिया और सऊदी अरब) कनेक्शन सामने आने के बाद इसे एनआईए को सौंपना अनिवार्य हो गया था।
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साक्ष्य हस्तांतरण: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बरामद हथियार, डिजिटल साक्ष्य और महत्वपूर्ण दस्तावेज एनआईए को सौंप दिए हैं, जिससे अब जांच की दिशा में तेजी आएगी।
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