भोपाल | सोमवार, 4 मई 2026
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज ग्वालियर के बेला गाँव में ऋषि गालव विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी। लगभग 110 करोड़ रुपये की लागत से 55 बीघा भूमि पर बनने वाला यह आवासीय विश्वविद्यालय ग्वालियर-चंबल संभाग के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
ग्वालियर: वीरता और विद्वता का संगम
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ग्वालियर ऐतिहासिक रूप से वीरता, कला और विद्वता का केंद्र रहा है। ऋषि गालव के नाम पर स्थापित यह संस्थान आने वाली पीढ़ियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि संस्कार, संस्कृति और कौशल से भी सुसज्जित करेगा। उन्होंने जोर दिया कि एक विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की कार्यशाला होता है।
मध्य भारत शिक्षा समिति का गौरवमयी इतिहास
डॉ. यादव ने मध्य भारत शिक्षा समिति और इसके संस्थापक सदाशिव गणेश गोखले के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई 1941 को पराधीनता के कठिन दौर में शुरू हुआ यह संकल्प आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसके तहत 5 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
उच्च शिक्षा में क्रांतिकारी नवाचार
मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों का उल्लेख किया:
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कुलपति अब ‘कुलगुरू’: अकादमिक नेतृत्व को अधिक श्रद्धापूर्ण और भारतीय बनाने के लिए ‘कुलपति’ के स्थान पर ‘कुलगुरू’ संबोधन को अनिवार्य किया गया है।
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भारतीय वेशभूषा: अब दीक्षांत समारोहों में औपनिवेशिक काल के काले कोट (गाउन) की जगह छात्र भारतीय वेशभूषा और साफे में अपनी डिग्री प्राप्त करते हैं।
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पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस: प्रदेश के सभी 55 जिलों में नई शिक्षा नीति के अनुरूप बहु-संकाय कॉलेजों को विकसित किया जा रहा है।
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महान विभूतियों को सम्मान: गुना में तात्या टोपे विश्वविद्यालय, खरगोन में क्रांतिसूर्य टंट्या भील और सागर में रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय की स्थापना इसी गौरव को पुनर्जीवित करने का हिस्सा है।
ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का मेल
ऋषि गालव विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक विज्ञान की शिक्षा दी जाएगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इसका शैक्षणिक सत्र गुरू पूर्णिमा 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
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