कोलकाता। अपडेटेड : मंगलवार, 5 मई 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 4 मई 2026 का दिन एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है। राज्य की जनता ने 15 वर्षों के तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन को उखाड़ फेंकते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को स्पष्ट जनादेश दिया है। ‘परिवर्तन’ का जो नारा कभी ममता बनर्जी ने दिया था, वह आज उनके खिलाफ ही राज्य की गलियों में गूंज रहा है।
चुनावी आंकड़ों का विश्लेषण
कुल 294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता थी, लेकिन भाजपा ने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए 206 सीटों पर कब्जा जमाया है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस महज 81 सीटों पर सिमट कर रह गई है। कांग्रेस और वामदलों का प्रदर्शन एक बार फिर निराशाजनक रहा, हालांकि कांग्रेस ने 2 सीटों के साथ सदन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
भवानीपुर: ‘दीदी’ की सबसे बड़ी हार
इस चुनाव का सबसे चर्चित मुकाबला भवानीपुर सीट पर था। भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने एक कड़े मुकाबले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक वोटों से पराजित किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों और ‘एंटी-इंकंबेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) ने ममता बनर्जी के इस गढ़ को ढहा दिया।
भाजपा की जीत के मुख्य कारण
-
भ्रष्टाचार और स्कैम: आरजी कर अस्पताल जैसी घटनाओं और भर्ती घोटालों ने युवाओं और महिलाओं के बीच सरकार की छवि को भारी नुकसान पहुँचाया।
-
ध्रुवीकरण और विकास का मेल: भाजपा ने विकास के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक पहचान (अस्मिता) को बचाने के मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाया।
-
महिला वोट बैंक में सेंध: संदेशखाली और अन्य घटनाओं के बाद टीएमसी का मजबूत महिला वोट बैंक विभाजित नजर आया।
Fact Check
सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक खबरें चल रही हैं कि चुनाव में हिंसा के कारण परिणाम बदल सकते हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल फाल्टा निर्वाचन क्षेत्र में पुनर्मतदान होगा (21 मई को), बाकी 293 सीटों के परिणाम अंतिम हैं। किसी भी अन्य सीट पर चुनाव रद्द होने की खबरें गलत हैं।
अगला कदम: नई सरकार का गठन
भाजपा आलाकमान अब मुख्यमंत्री के नाम पर विचार कर रहा है। सुवेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार रेस में सबसे आगे हैं। बंगाल में दशकों बाद एक गैर-कांग्रेसी, गैर-वामपंथी और गैर-टीएमसी सरकार बनने जा रही है।
Matribhumisamachar


