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मोदीनगर के सेंट टेरेसा स्कूल में टैटू विवाद: क्या है पूरी सच्चाई? मतांतरण के आरोपों पर गरमाया माहौल

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लखनऊ | मंगलवार, 5 मई 2026

गाजियाबाद के मोदीनगर में स्थित सेंट टेरेसा स्कूल इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। एक शिक्षिका द्वारा स्कूल प्रबंधन पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव और विरोध प्रदर्शन की स्थिति बन गई है। मामला न केवल व्यक्तिगत आस्था का है, बल्कि इसमें ‘मतांतरण के दबाव’ जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हो गए हैं।

विवाद की जड़: ‘ओम’ और ‘महादेव’ का टैटू

मामले की शुरुआत तब हुई जब स्कूल की एक शिक्षिका ने आरोप लगाया कि प्रबंधन उन पर अपनी धार्मिक पहचान छुपाने का दबाव बना रहा था। शिक्षिका के अनुसार, उनके हाथ पर ‘ओम’ (ॐ) और ‘महादेव’ के टैटू बने हुए हैं, जिन्हें हटाने के लिए स्कूल प्रशासन ने बार-बार निर्देश दिए।

आरोप है कि जब शिक्षिका ने अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए टैटू हटाने से इनकार कर दिया, तो प्रबंधन ने उन पर धर्म परिवर्तन (मतांतरण) के लिए भी अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाया। अंततः, अपनी बात पर अडिग रहने के कारण शिक्षिका को स्कूल से निष्कासित कर दिया गया।

विरोध और तनावपूर्ण माहौल

शिक्षिका को निकाले जाने की खबर जैसे ही स्थानीय हिंदू संगठनों तक पहुंची, मामला गरमा गया। भारी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी स्कूल परिसर के बाहर एकत्र हो गए और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

  • जय श्री राम के नारे: प्रदर्शन के दौरान उत्तेजित भीड़ ने स्कूल के मुख्य द्वार (Main Gate) पर स्प्रे पेंट से ‘जय श्री राम’ लिख दिया।

  • प्रबंधन का घेराव: संगठनों ने स्कूल पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और भारतीय संस्कृति के अपमान का आरोप लगाया।

पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए मोदीनगर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराया और स्कूल प्रशासन से मामले की जानकारी ली।

पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष:

“हमें शिक्षिका और प्रबंधन के बीच विवाद की सूचना मिली है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और स्कूल के बाहर पुलिस बल तैनात है।”

संभावित सुधार और निष्पक्षता की मांग

जहाँ एक ओर संगठनों का आरोप है कि यह सोची-समझी साजिश है, वहीं कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि यह प्रबंधन और कर्मचारी के बीच का विवाद भी हो सकता है। हालांकि, ‘टैटू’ और ‘धार्मिक प्रतीकों’ के आधार पर निष्कासन भारतीय श्रम कानूनों और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है।

स्थानीय संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।

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