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धर्मांतरण का विरोध कर रहे बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर चर्च से हुआ पथराव

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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रायपुर. छत्तीसगढ़ के दुर्ग में ईसाई समुदाय और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के बीच रविवार को जमकर मारपीट हो गई। धर्मांतरण के विरोध में पहुंचे बजरंगियों पर ईसाई समुदाय के लोगों ने पत्थर से हमला कर दिया। इस पर बजरंग दल कार्यकर्ता चर्च में घुस गए और दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस फोर्स के साथ अफसर पहुंचे और किसी तरह से लोगों को समझाकर शांत कराया। बजरंग दल कार्यकर्ताओं का आरोप है कि चर्च में धर्मांतरण कराया जा रहा था। मामला दुर्ग के रायपुर नाका स्थित चर्च का है। फिलहाल मौके पर फोर्स तैनात है।

जानकारी के मुताबिक, चर्च में रविवार सुबह करीब 10-11 बजे प्रार्थना हो रही थी। उसी समय अचानक से बजरंग दल के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए। आरोप लगाया कि चर्च में दूसरे धर्म के लोगों के धर्मांतरण के लिए उनका ब्रेनवॉश किया जा रहा है। लालच भी दे रहे हैं। इसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने चर्च के बाहर जय श्रीराम के नारे लगाना शुरू कर दिया। यह देख ईसाई समुदाय के लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने उनके ऊपर पत्थर फेंकना शुरू किया। इससे बजरंग दल कार्यकर्ता भी उग्र हो गए और चर्च में घुस गए।

इस दौरान दोनों पक्ष के बीच जमकर मारपीट और झूमा-झटकी होने लगी। मामले की सूचना किसी ने पुलिस को दी। इसके बाद 6-7 थानों की फोर्स और 200 से 250 जवान मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे काफी उग्र थे।

पुलिस के आश्वासन के बाद माने बजरंगी

बजरंग दल के कार्यकर्ता ने पुलिस की मौजूदगी में जय श्रीराम के नारे लगाए। कहा कि धर्मांतरण हुआ तो वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। एएसपी सिटी अभिषेक झा सहित लगभग 7 थानों के टीआई, पुलिस बल, सीएसपी आदि अधिकारी वहां मौजूद रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को समझाया और जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद माहौल शांत हुआ।

चर्च को बंद करने की बजरंगियों ने की मांग

बजरंग दल के पदाधिकारी रामलोचन तिवारी ने बताया कि यहां साजिश के तहत धर्मांतरण कराने का कार्य किया जा रहा था। ये लोग भोले-भाले हिंदुओं को दाल, चावल, दवा और अन्य व्यवस्था करने का प्रलोभन देकर ऐसा करते हैं। प्रशासन इन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। ये जो प्राइवेट चर्च संचालित है। इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए।

साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।