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भाजपा नेतृत्व तय करेगा तो लडूंगी डिम्पल यादव के खिलाफ चुनाव : अपर्णा यादव

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. दो साल पहले बीजेपी ज्वाइन करने वाली अपर्णा यादव के लोकसभा चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि गुरुवार को जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या वे मैनपुरी सीट से चुनाव लड़ेंगी जहां से उनकी जेठानी डिंपल यादव मैदान में हैं? इस पर अपर्णा यादव की तरफ से सधी हुई प्रतिक्रिया दी और संभावनाओं से इनकार भी नहीं किया. उन्होंने कहा कि जैसा सीनियर लीडरशिप तय करेगा मैं वही करूंगी.

दरअसल, कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला द्वारा मथुरा सीट से मौजूदा सांसद और बीजेपी प्रत्याशी हेमा मालिनी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर राजधानी लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को  संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और कहा कि महिलाओं की अस्मिता और आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने कांग्रेस का पुराना कल्चर है. महिलाओं का अपमान करना कांग्रेस के डीएनए में है. उन्होंने कहा कि बीजेपी नारी का सम्मान करती है. महिला को सशक्त करती है. वहीं कांग्रेस नेता महिलाओं को लेकर अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं. हेमा मालिनी पर रणदीप सुरजेवाला की टिप्पणी निंदनीय है. चुनाव आयोग से अपील है कि इनकी टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए करवाई हो. कांग्रेस के कई नेता इस तरह के बयान देते आए हैं. सुप्रिया श्रीनेत ने कंगना रनौत पर गलत टिप्पणी की. कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े लोगों पर भी महिलाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार के उदाहरण सामने आए हैं. देश की मातृशक्ति के अपमान का जवाब 2024 में मिलेगा.

इस दौरान मैनपुरी सीट से चुनाव लड़ने के सवाल का जवाब भी अपर्णा यादव ने दिया और कहा कि जैसा सीनियर लीडरशिप तय करेगा मैं वही करूंगी. राहुल और प्रियंका के अमेठी रायबरेली से चुनाव लड़ने पर अपर्णा यादव ने कहा कि ये हमेशा झूठ और लोगों को गुमराह करने की बाते करते हैं. इनका सच उजागर हो रहा है. ये लड़ने की परिस्थिति में नहीं हैं. अमेठी-रायबरेली भी बीजेपी जीतेगी.

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।