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मोहम्मद यूनुस ने ली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख की शपथ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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ढाका. मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख बन गए है। उन्हें आज रात 8 बजकर 50 मिनट पर राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पद की शपथ दिलाई। 13 अन्य सदस्यों ने भी शपथ ली। अंतरिम सरकार में यूनुस के अलावा 16 सदस्य होंगे। ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, शपथ समारोह में करीब 400 लोग शामिल हुए। भारत को भी न्योता मिला था, लेकिन किसी इस बारे में और ज्यादा जानकारी नहीं है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया है कि शेख हसीना का आगे का क्या प्लान है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। आरक्षण आंदोलन हिंसक होने के बाद हसीना 5 अगस्त को ढाका छोड़कर दिल्ली आ गई थीं।

स्टेट गेस्ट हाउस में रहेंगे चीफ एडवाइजर यूनुस

अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर बनने के बाद मोहम्मद यूनुस स्टेट गेस्ट हाउस जमुना में रहेंगे। ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, हसीना के देश छोड़कर जाने के बाद प्रदर्शनकारी PM आवास गणभबन में घुस गए थे। उन्होंने यहां तोड़फोड़ की, जिसकी वजह से फिलहाल गणभबन रहने लायक नहीं है। लिहाजा स्टेट गेस्ट हाउस को चीफ एडवाइजर का आवास बनाया जा रहा है।

BNP ने 3 महीने में चुनाव की मांग की

पूर्व PM खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग की है। बुधवार को हुई रैली में BNP नेताओं ने कहा कि जनता की चुनी हुई सरकार को सत्ता मिलनी चाहिए। इसके लिए चुनाव की जरूरत है। BNP ने मांग की है कि देश में 3 महीने के अंदर चुनाव कराए जाने चाहिए।

हसीना की बेटी बोलीं- दुखी हूं मां को गले नहीं लगा सकती

बांग्लादेश छोड़ने और पीएम पद से इस्तीफा देने के बाद शेख हसीना भारत में हैं। उन्हें सेफ हाउस में रखा गया है। इस बीच उनकी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रीजनल डायरेक्टर और हसीना की बेटी बेटी साइमा वाजेद ने ट्वीट किया है। उन्हें लिखा है, “दुखी हूं, मां को देख नहीं सकती, गले नहीं लगा सकती।” दूसरी ओर बांग्लादेश में हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच BSF ने भारत में घुसने की कोशिश कर रहे करीब 1500 बांग्लादेशियों को रोका है। इनमें से 1 हजार लोग बिहार और 500 लोग पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के रास्ते भारत आ रहे थे। घुसपैठ को देखते हुए भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर BSF अलर्ट हो गई है।

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साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।