शनिवार, सितंबर 19 2026 | 07:25:55 PM

महाराष्ट्र में जीबीएस मरीजों की संख्या बढ़कर 158 पहुँची

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. महाराष्ट्र के पुणे में जीबीएस के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. यहां मरीजों की संख्या 158 तक पहुंच गई है. अंदेशा जताया जा रहा है कि पुणे में प्रदूषित पानी के कारण रोगियों की संख्या बढ़ रही है. ज़्यादातर केस पुणे और उसके आस-पास के इलाकों से हैं. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 31 मरीज पुणे महानगर पालिका, 83 मरीज सिंहगढ़ रोड, किर्किटवाड़ी, नंदोशी और उसी क्षेत्र के कुछ गांवों से हैं. इसके अलावा 18 मरीज पिंपरी चिंचवड़, 18 मरीज पुणे ग्रामीण, जबकि 8 मरीज दूसरे जिलों के हैं. अब तक 38 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है. वहीं, 21 मरीज वेंटिलेटर पर हैं.

महाराष्ट्र में GBS का कहर!

महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) की वजह से मरने वालों की संख्या शनिवार (02 फरवरी) को 5 हो गई. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में जनकारी दी. पुणे के वारजे इलाके के 60 साल के शख्स की शनिवार को श्वसन संबंधी परेशानियों के कारण मौत हो गई. व्यक्ति में जीबीएस की पुष्टि हुई थी. इससे पहले, राज्य में जीबीएस से चार लोगों की मौत हुई थी.

अलग-अलग हिस्सों से पानी के नमूने लैब भेजे गए

पुणे शहर के अलग-अलग हिस्सों से पानी के कई नमूने केमिकल और जैविक विश्लेषण के लिए पब्लिक हेल्थ लैब में भेजे गए हैं. जांच में आठ जल स्रोतों के नमूने दूषित पाए गए हैं. एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया था कि पुणे शहर के अलग-अलग इलाकों से कुल 160 जल के नमूने रासायनिक और जैविक विश्लेषण के लिए लैबे में भेजे गए हैं. अधिकारी के मुताबिक सिंहगढ़ रोड इलाके में कुछ निजी बोरवेल से लिए गए नमूनों में से एक में एस्चेरिचिया कोली या ई-कोली बैक्टीरिया की मौजूदगी देखी गई है. उन्होंने बताया कि पानी में ई-कोली का होना मल या एनिमल वेस्ट से गंदगी फैलने का संकेत है. ये जीबीएस संक्रमण की वजह बन सकती है.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।