नई दिल्ली. भारत ने चीन से आने वाले पेशेवरों के लिए बिजनेस वीजा प्रक्रिया को सरल और तेज कर दिया है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दो सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि यह कदम एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में काफी अहम है. लंबे समय से वीजा में हो रही देरी की वजह से तकनीकी कर्मचारियों की कमी पैदा हो गई थी. इसकी वजह से कंपनियों का उत्पादन प्रभावित हो रहा था और उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा था. भारत ने वीजा प्रक्रिया में एक अतिरिक्त नौकरशाही स्तर हटा दिया है. इसकी वजह से अब चीनी पेशेवरों को बिजनेस वीजा एक महीने से कम समय में मिल रही है. गौरतलब है कि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वार के बाद भारत और चीन संबंध सुधारने में लगे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजिंग के साथ रिश्तों को धीरे-धीरे दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं.
वीजा पाबंदियों में ढील एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के बाद दी गई, जिसकी अध्यक्षता पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा कर रहे थे. यह समिति चीन से जुड़े निवेश प्रतिबंधों में नरमी पर भी काम कर रही है, ताकि विदेशी निवेशकों की धारणा को सुधारा जा सके. थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन का अनुमान है कि सख़्त वीजा जांच की वजह से पिछले चार साल में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को करीब 15 अरब डॉलर के उत्पादन नुकसान का सामना करना पड़ा. ये कंपनियां मोबाइल फोन बनाने के लिए चीन से अहम मशीनरी आयात करती हैं. रॉयटर्स ने पिछले साल बताया था कि शाओमी जैसी बड़ी चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को भी वीजा मिलने में काफी परेशानी हुई. इन पाबंदियों से भारत में विस्तार की योजनाओं को झटका लगा, वहीं सोलर इंडस्ट्री भी कुशल श्रमिकों की कमी से प्रभावित हुई.
2020 के बाद भारत ने सख्त कर दिए थे वीजा नियम
2020 में भारत और चीन के बीच विवाद बढने के बाद भारत ने वीजा नियम काफी सख्त कर दिए और बहुत कम वीजा जारी किए. बिजनेस वीजा की जांच प्रक्रिया में गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के साथ अन्य मंत्रालयों को भी जोड़ा गया. लेकिन अब वीजा प्रक्रिया में से प्रशासनिक जांच की अतिरिक्त लेयर को हटा लिया गया है. मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “हमने प्रशासनिक जांच की अतिरिक्त परत हटा दी है और अब बिजनेस वीजा को चार हफ्तों के भीतर प्रोसेस किया जा रहा है.” हालांकि विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और सरकार के शीर्ष थिंक टैंक ने इस मामले में ई-मेल के जरिए भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया.
वहीं, इस फैसले के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने नोटिस किया है कि लोगों के आपसी संपर्क को आसान बनाने के लिए भारत ने कुछ “पॉजिटिव स्टेप” उठाए हैं. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, “चीन साझा हित में लोगों के बीच आदान-प्रदान को आसान बनाने के स्तर को लगातार बेहतर करने के लिए भारत के साथ संवाद और परामर्श बनाए रखने को तैयार है.”
अमेरिकी टैरिफ के बाद भारत-चीन रिश्तों में आई गर्माहट
भारत और चीन के रिश्तों में में यह नरमी अमेरिका द्वारा छेड़े गए टैरिफ वार के बाद आई है. ट्रंप के टैरिफ लगाने के बाद भारत ने चीन के साथ रिश्तों को संतुलित करने और रूस के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर दिया है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल सात साल बाद चीन का दौरा किया था. उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की. इसके बाद दोनों देशों के बीच 2020 के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच सीधी हवाई उड़ानें भी शुरू हुईं.
इंडस्ट्री ने बताया स्वागत योग्य कदम
इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के प्रमुख पंकज मोहिंद्रू ने भारत द्वारा चीनी पेशेवरों को वीजा नियमों में ढील देने पर कहा, “हम सीमाएं साझा करने वाले देशों के पेशेवरों के लिए स्किल्ड वीजा की मंज़ूरी को तेज करने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं. यह सहयोगी रवैये और हमारी सिफारिशों को स्वीकार करने का संकेत है.” उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत तैयार उत्पादों से लेकर कंपोनेंट्स और सब-असेंबली तक, हर स्तर पर उत्पादन बढ़ा रहा है.
भारत-चीन के बीच कितना होता है व्यापार?
भारत और चीन के बीच वित्त वर्ष 2024-25 में कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 127.7 अरब डॉलर रहा. हालांकि इस व्यापार का संतुलन भारत के पक्ष में नहीं है और व्यापार घाटा लगातार एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में चीन से करीब 113.45 अरब डॉलर का आयात किया. वहीं दूसरी ओर भारत का चीन को निर्यात अपेक्षाकृत काफी कम रहा. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने चीन को लगभग 14.25 अरब डॉलर का निर्यात किया. इस तरह भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 99.2 अरब डॉलर रहा.
भारत ने चीन से इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs), प्लास्टिक, ऑर्गेनिक केमिकल और उर्वरकों का आयात ज्यादा करता है. भारत चीन को लौह अयस्क, कपास और अन्य कच्चा माल, कपड़ा, एल्यूमीनियम, लोहा, चमड़े का सामान, पत्थर और सीमेंट जैसे उत्पाद ज्यादा निर्यात करता है.
इस साल चीन ज्यादा खरीद रहा है भारतीय प्रोडक्ट्स
इस साल भारत का चीन को निर्यात बढा है. वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही यानी अप्रैल–सितंबर 2025 के दौरान भारत का चीन को निर्यात 8.41 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 6.90 अरब डॉलर के मुकाबले करीब 22 अधिक है. यह तेजी अक्टूबर तक और मजबूत हुई. अप्रैल–अक्टूबर 2025 के दौरान भारत का चीन को कुल निर्यात बढ़कर 10.03 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर लगभग 24.7 से 25 फीसदी की वृद्धि को दर्शाता है. खास बात यह है कि मासिक निर्यात में लगातार सुधार देखा गया है.
साभार : न्यूज18