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न्यायिक आयोग के सामने पेश हुए संभल सांसद जियाउर रहमान बर्क

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. संभल हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग के समक्ष आज सांसद जियाउर रहमान बर्क (Ziaur Rahman Barq) ने अपना बयान दर्ज करवाया. आयोग के समक्ष पेश होने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं. बर्क ने कहा, जो मुझसे जानकारी मांगी गई, जो सवाल पूछे गए, उनकी जानकारी मैंने आयोग को उपलब्ध करा दी है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अपने ऊपर दर्ज आपराधिक मुकदमों की जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं दे सकते और इस पर वह चुप्पी साध गए.

उन्होंने कहा क्या सवाल-जवाब हुए यह मैं नहीं बता सकता, यह मेरी मजबूरी है. आरोप और उनका सबूत दो अलग बातें हैं. जो आरोप मेरे ऊपर लगाए गए हैं, वे पूरी तरह गलत हैं. लोकसभा सांसद के तौर पर अपने दायित्व का जिक्र करते हुए बर्क ने कहा, मैं देश की जनता द्वारा चुना गया जनप्रतिनिधि हूं, देश की सबसे बड़ी पंचायत का सदस्य हूं. मेरा काम है कि मैं संविधान और कानून पर भरोसा करते हुए देश को तरक्की के रास्ते पर ले जाऊं. उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में आस्था जताते हुए कहा मुझे कानून, संविधान और न्यायालय पर पूरा भरोसा है, और मुझे यकीन है कि मुझे इंसाफ मिलेगा.

‘कोर्ट के अंदर होगा दूध का दूध और पानी का पानी’

मीडिया से अपील करते हुए सांसद ने कहा, मैं मीडिया के सम्मानित साथियों से गुजारिश करूंगा कि वो इस मामले का ट्रायल न करें. कोर्ट के अंदर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. सांसद ने यह भी कहा कि वह न्यायिक आयोग के समक्ष इसी उम्मीद से उपस्थित हुए हैं कि उन्हें और उनकी जनता को न्याय मिलेगा. “मुझे भरोसा है कि आयोग ऐसी रिपोर्ट बनाएगा जिससे मुझे और मेरे लोगों को इंसाफ मिलेगा.

वक्फ मामले पर भी उन्होंने टिप्पणी की और बताया कि  सर्वोच्च न्यायालय में कल दोपहर 2 बजे फिर सुनवाई होगी. आज कोर्ट की ओर से इस पर सख्त टिप्पणी की गई है. हम इस उम्मीद से सुप्रीम कोर्ट गए हैं कि हमारे लोगों का संरक्षण होगा. अंत में उन्होंने कहा, “अगर इस देश में एक सांसद को इंसाफ के लिए कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, तो यह आम जनता के लिए चिंता की बात है. आयोग के सवाल काफी थे, और मैंने सभी का सच्चाई से जवाब दिया है.”

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।