शनिवार, सितंबर 19 2026 | 12:10:47 PM

मोदी सरकार की कार्रवाई से घबराए नक्सली चाहते हैं सीजफायर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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रायपुर. माओवादी संगठन ने शांति वार्ता के लिए अस्थायी रूप से हथियार छोड़ने का निर्णय लिया है। यह कदम संगठन को पिछले एक महीने में हुए बड़े नुकसानों के कारण बढ़ते दबाव का परिणाम माना जा रहा है।

माओवादी प्रवक्ता अभय द्वारा जारी की गई थी विज्ञप्ति

पार्टी के प्रवक्ता अभय द्वारा 15 अगस्त को जारी इस बयान में केंद्र सरकार से एक महीने का औपचारिक संघर्ष-विराम (सीजफायर) घोषित करने और तलाशी अभियानों को रोकने का अनुरोध किया गया है।

माओवादी सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार

विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया है कि माओवादी सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, चाहे वह गृह मंत्री या उनके द्वारा नियुक्त प्रतिनिधिमंडल के साथ हो।

माओवादियों ने एक महीने का समय मांगा

हालांकि, माओवादियों ने संगठन के भीतर और जेल में बंद अपने साथियों से सलाह-मशविरा करने के लिए एक महीने का समय मांगा है।

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बड़े नक्सलियों की मौत से घबराए

पिछले एक माह में माओवादियों को तीन बड़े नुकसान उठाने पड़े हैं, जिनमें गरियाबंद में बालकृष्ण का मारा जाना, झारखंड में सहदेव का मारा जाना और सुजाता का आत्मसमर्पण शामिल है। इन घटनाओं के कारण संगठन पर दबाव बढ़ गया है, जिससे बाद यह पत्र जारी किया गया है।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।