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आईबी प्रमुख तपन डेका को मिला एक साल का सेवा विस्तार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के डायरेक्टर तपन कुमार डेका का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। यह फैसला मंगलवार को लिया गया। अब वे आगे भी इस पद पर बने रहेंगे। कार्मिक मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। इस बयान में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने यह फैसला लिया है। तपन कुमार डेका, IPS (HP:88) अब 30 जून, 2025 के बाद भी IB के डायरेक्टर बने रहेंगे। यह विस्तार FR 56 (d) और अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के नियम 16 (1A) के प्रावधानों में रियायत के आधार पर दिया गया है। सरकार ने कहा है कि वे 30 जून, 2025 से आगे भी या अगले आदेश तक इस पद पर बने रहेंगे।

कौन हैं तपन कुमार डेका?

तपन कुमार डेका हिमाचल प्रदेश कैडर के 1988 बैच के IPS अधिकारी हैं। वे काफी समय से इस पद पर हैं। अब उनका कार्यकाल 30 जून, 2025 के बाद भी जारी रहेगा। उन्हें आतंकवाद से जुड़े मामलों का एक्सपर्ट माना जाता है। डेका ‘सुपरस्पाई’ के नाम से भी जाने जाते हैं। उन्होंने 2008 में 26/11 के मुंबई हमले के दौरान भी बड़ी जिम्मेदारी संभाली थी।

खुफिया विभाग में ‘संकटमोचक’

2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम के बाद असम में हिंसा को संभालने के लिए उन्हें वहां भी भेजा गया था। वह जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में ‘ऑपरेशंस’ के विशेषज्ञ माने जाते हैं। तपन डेका को खुफिया विभाग में ‘संकटमोचक’ माना जाता है। उनका कार्यकाल अगले महीने खत्म होने वाला था। 2022 में उन्हें दो साल के लिए आईबी चीफ बनाया गया था। 2024 में,डेका का कार्यकाल जून 2025 तक बढ़ा दिया गया।

महत्वपूर्ण समय में मिला सेवा विस्तार

डेका के सेवा विस्तार के लिए जिस नियम का जिक्र किया गया है, उसके तहत केंद्र सरकार को ‘जन हित’ में आईबी और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुखों, कैबिनेट सचिव, गृह सचिव और अन्य की महत्वपूर्ण सेवाओं में अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे अफसरों को 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु के बाद भी बढ़ाने की अनुमति देते हैं। पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश में सुरक्षा के माहौल को देखे हुए तपन कुमार डेका को सेवा विस्तार मिलना काफी मायने रखता है।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।