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तेलंगाना की ढही सुरंग में अभी भी फंसे हुए हैं 8 लोग

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हैदराबाद. शनिवार को तेलंगाना के श्रीशैलम लेफ्ट बैंक नहर परियोजना की सुरंग की छत का एक हिस्सा ढह जाने के बाद करीब 14 किलोमीटर अंदर 30 घंटे से अधिक समय से आठ लोग फंसे हुए हैं. बचाव दल आगे बढ़ते हुए उस स्थान पर पहुंच गया, जहां घटना के दौरान सुरंग खोदने वाली मशीन काम कर रही थी. उन्होंने कहा कि हालांकि, गाद और गंदा पानी के कारण उस स्थान तक पहुंचने में चुनौती बनी हुई है, जहां लोगों के फंसे होने की आशंका है. इस बीच, तेलंगाना सरकार सेना, नौसेना, एनडीआरएफ के साथ बचाव कार्य कर रही है.

ऑपरेशन एसएलबीसी टनल के एक भाग के रूप में लोकोमोटिव ट्रेन द्वारा एक विशाल जनरेटर को सुरंग में भेजा गया. अधिकारी इसके जरिए बिजली व्यवस्था बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, बचाव दल मिट्टी खोदने वाले उपकरणों और पानी के अंदर लगे स्कैनर के साथ सुरंग के अंदर गया. नागरकुरनूल के कलेक्टर संतोष ने कहा कि कीचड़ और गंदे पानी की वजह से बचाव दल को सुरंग तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि वे भारी मोटरों और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके पानी बाहर निकाल रहे हैं.

सुरंग की 450 मीटर करनी होगी खुदाई

एसएलबीसी सुरंग पर पहुंचे मंत्री उत्तम और जुपल्ली कृष्ण राव ने अनुबंध एजेंसियों और बचाव कर्मियों से मुलाकात की. अधिकारियों ने मंत्रियों को सुरंग के निकट चल रहे राहत कार्यों की जानकारी दी. मंत्री उत्तम ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य आठ लोगों की जान बचाना था. उन्होंने कहा कि वे ऊपर से और बगल से सुरंग खोदने के सभी संभावित तरीकों पर विचार कर रहे हैं.

एसएलबीसी सुरंग के ढहने वाले क्षेत्र में ऊपर से खुदाई की संभावनाओं पर अधिकारियों के साथ समीक्षा की गई. अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ी से सुरंग तक पहुंचने के लिए लगभग 450 मीटर खुदाई करनी पड़ेगी. मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव ने कहा कि छत गिरने के बाद एसएलबीसी सुरंग में भारी मात्रा में कीचड़ और गंदा पानी घुस गया है. बताया जा रहा है कि बचाव दल बिना एक मिनट भी बर्बाद किए कीचड़ और गंदे पानी को हटाने की कोशिश कर रहे हैं.

टनल के अंदर गई पहली टीम

सेना के चिकित्सा अधिकारी सूर्य किरण कहा कि सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कुल तीन टीमें हैं जो हताहतों को निकालने के लिए तैयार हैं. पहली टीम अभी अंदर गई है. उनके लौटने के बाद हम स्थिति का पता लगाएंगे. हम सभी उपकरणों और दवाओं के साथ तैयार हैं. श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग के अंदर चल रहे बचाव अभियान के दौरान आपातकालीन उपचार के लिए केंद्रीय और राज्य चिकित्सा दल तैनात हैं. भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

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