रविवार, सितंबर 20 2026 | 03:42:04 AM

हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार को हाईवे के किनारे 500 मीटर की दूरी में संचालित शराब ठेकों को हटाने का दिया आदेश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

जयपुर. राजस्थान प्रदेश में अब आगे से स्टेट और नेशनल हाईवे के किनारे शराब के ठेके नहीं दिखेंगे। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने बुधवार को अपना सख्त और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राजस्थान सरकार को आड़े हाथ लिया। अदालत ने कहा कि सरकार ने हाईवे को “लिकर फ्रेंडली कॉरिडोर” बना डाला। हाई कोर्ट ने सरकार को प्रदेश में स्टेट और नेशनल हाईवे के किनारे 500 मीटर की दूरी में संचालित 1102 शराब के ठेकों को हटाने के आदेश दिए हैं। सभी ठेकों को अगले 2 महीने की भीतर हटाने को कहा गया है। हाईकोर्ट के जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने यह निर्देश दिया।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने फैसला में सख्त टिप्पणी की। कोर्ट का कहना है कि सरकार ने म्युनिसिपल एरिया की आड़ में हाईवे को ‘लिकर-फ्रेंडली कॉरिडोर’ बना दिया, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चाहे ये ठेके नगरपालिका या शहरी सीमा में ही क्यों न आते हों, अगर ये हाईवे पर है, तो इन्हें हटाना ही होगा। हाईकोर्ट ने हाइवे किनारे से शराब के ठेके हटाने का यह फैसला प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों और ‘ड्रंक एंड ड्राइव’ के मामलों को देखते हुए दिया है।

सरकार की दलील, शहरी सीमा में हैं ठेके

सुनवाई के दौरान सरकार ने अपना पक्ष रखा और स्वीकार किया कि प्रदेश में कुल 7665 शराब की दुकानों में से 1102 दुकानें स्टेट और नेशनल हाईवे पर है। सरकार ने दलील दी, कि ये दुकानें आबादी/नगरपालिका क्षेत्र में आती है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट की छूट के दायरे में है। सरकार ने यह भी बताया कि इन 1102 दुकानों से राज्य को सालाना करीब 2221.78 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मजाक बना दिया

इधर, हाईकोर्ट ने सरकार की दलील को सिरे से खारिज कर दिया। आगे तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार ने ‘नगरपालिका क्षेत्र’ की आड़ में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का मजाक बना दिया है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है। 2200 करोड़ रुपए के राजस्व के लिए हम लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। प्रदेश में करीब 7765 शराब की दुकानें हैं। इनसे विभाग को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 17 हजार 200 करोड़ रुपए का राजस्व मिला। यह प्रदेश के सरकारी विभागों में सबसे ज्यादा आय है।

- Advertisement -

ड्रंक एंड ड्राइव के 8% मामले बढ़े

हाईकोर्ट ने बताया कि साल 2025 में अब तक ड्रंक एंड ड्राइव के मामलों में करीब 8% की बढ़ोतरी हुई है। सितंबर 2025 तक ऐसे 43,788 मामले सामने आ चुके हैं। कोर्ट ने हाल ही में हुए जयपुर के हरमाड़ा और फलौदी हादसे का हवाला दिया। कहा हरमाडा में (15 मौतें) और फलोदी (15 मौतें) में हुई। भीषण सड़क हादसों का हवाला देते हुए कहा कि शराब पीकर गाड़ी चलाना जानलेवा साबित हो रहा है।

कोर्ट के दो टूक निर्देश

कोर्ट ने अपने आदेश में 2 टूक निर्देश दिए हैं कि स्टेट और नेशनल हाईवे से 500 मीटर की दूरी के भीतर कोई भी शराब की दुकानें नहीं चलेगी। सरकार को ये 1102 दुकानें 2 महीने के भीतर शिफ्ट करनी होंगी। शराब का कोई भी होर्डिंग या विज्ञापन हाईवे से दिखाई नहीं देना चाहिए। अगली सुनवाई 26 जनवरी 2026 को होगी, जिसमें आबकारी आयुक्त को पालना रिपोर्ट पेश करनी होगी।

साभार : नवभारत टाइम्स

‘गांधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ पुस्तक के बारे में जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें :

https://matribhumisamachar.com/2025/12/10/86283/

- Advertisement -

आप इस ई-बुक को पढ़ने के लिए निम्न लिंक पर भी क्लिक कर सकते हैं:

https://www.amazon.in/dp/B0FTMKHGV6

यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।