नई दिल्ली । बुधवार, 1 जुलाई 2026
देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक सुरक्षित और दीर्घकालिक बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर बनने वाले सभी नए और प्रमुख पुलों की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए अब देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों (IITs) की मदद ली जाएगी। यह ऐतिहासिक पहल देश में पुलों के निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा और उनकी आयु को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।
इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत, पुलों के निर्माण कार्य की शुरुआत होने से पहले ही उनके हाइड्रोलिक अध्ययन (पानी के बहाव का असर) और स्ट्रक्चरल डिजाइन की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी जांच (Independent Vetting) की जाएगी।
12 आईआईटी (IITs) संभालेंगे देश की सुरक्षा का जिम्मा
NHAI के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस राष्ट्रीय पहल में शामिल होने के लिए देश के लगभग 12 प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों ने अपनी सहमति दे दी है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi)
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आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay)
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आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee)
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आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur)
इन तकनीकी दिग्गजों को सूचीबद्ध (Empanel) करने का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के राजमार्गों पर बनने वाले बड़े पुल कम से कम 100 वर्ष या उससे अधिक की सेवा अवधि (Service Life) के लिए पूरी तरह सक्षम और सुरक्षित डिजाइन किए जाएं।
क्या है लेटेस्ट अपडेट?
इस नई नीति को अधिक प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कुछ और कड़े कदम उठाए हैं, जिन्हें समझना जरूरी है:
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सभी प्रोजेक्ट मॉडल्स पर समान नियम: यह व्यवस्था केवल किसी एक प्रकार के ठेके पर लागू नहीं होगी। चाहे निर्माण कार्य EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड पर हो, HAM (हाइब्रिड एन्युटी मॉडल) पर हो, या फिर BOT (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) के तहत हो; सभी पर यह ‘क्वालिटी एश्योरेंस मैकेनिज्म’ समान रूप से लागू होगा।
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डिजिटल पुल इन्वेंट्री (IBMS Survey): सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने हाल ही में सभी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि 30 सितंबर तक देश के सभी पुलों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाए। इसे इंडियन ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम (IBMS) के तहत ट्रैक किया जाएगा ताकि वैज्ञानिक तरीके से उनकी निगरानी हो सके।
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कड़े सुरक्षा ऑडिट का असर: हाल ही में NH-66 पर हुए एक ओवरब्रिज हादसे के बाद, आईआईटी विशेषज्ञों की समिति ने मिट्टी की स्थिरता (Geotechnical Investigation) और पिलर-आधारित मजबूत डिजाइनों को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है, जिसे NHAI अब नए नियमों के तहत अनिवार्य कर रहा है।
डिजाइन और निर्माण की 360-डिग्री समीक्षा
इस स्वतंत्र समीक्षा के तहत आईआईटी के प्रोफेसर और विशेषज्ञ पुल से जुड़े हर बारीक पहलू का अध्ययन करेंगे, जिनमें शामिल हैं:
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स्ट्रक्चरल डिजाइन कैलकुलेशन: क्या पुल भारी से भारी कमर्शियल वाहनों का भार सहने योग्य है?
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भू-तकनीकी जांच (Geotechnical Investigation): जिस जमीन या मिट्टी पर पुल के पिलर खड़े होने हैं, उसकी ताकत की सही जांच।
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हाइड्रोलिक अध्ययन (Hydraulic Studies): जलवायु परिवर्तन के कारण अचानक आने वाली बाढ़ या पानी के तेज बहाव से पुल के फाउंडेशन को कोई खतरा तो नहीं होगा?
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कंस्ट्रक्शन मेथोडोलॉजी: निर्माण के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों का स्वतंत्र मूल्यांकन।
पुल सुरक्षा ऑडिट के प्रमुख स्तंभ और उनके लाभ
| ऑडिट का मुख्य क्षेत्र | देश और जनता को होने वाले प्रत्यक्ष लाभ |
| दुर्घटनाओं पर लगाम | डिजाइन स्तर पर ही गलतियां सुधर जाने से भविष्य में पुल गिरने जैसी जानलेवा दुर्घटनाओं का खतरा खत्म हो जाएगा। |
| टैक्सपेयर्स के पैसे की बचत | बार-बार होने वाले महंगे मेंटेनेंस और रिपेयरिंग के काम से मुक्ति मिलेगी, जिससे सरकारी खजाने को बड़ी राहत होगी। |
| मजबूत लॉजिस्टिक्स और व्यापार | बंदरगाहों और औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) को जोड़ने वाले हाईवे बिना किसी रुकावट के भारी माल ढुलाई के लिए हमेशा चालू रहेंगे। |
विशेषज्ञों की राय: देश में इंफ्रास्ट्रक्चर तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कई बार निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। NHAI का आईआईटी संस्थानों को ‘थर्ड-पार्टी इंडिपेंडेंट ऑडिटर’ बनाना ठेकेदारों और डिजाइनरों की जवाबदेही को सौ गुना बढ़ा देगा। यह कदम भविष्य के एक सुरक्षित और ‘फ्यूचर-रेडी’ भारत की नींव रखेगा।
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