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ईरान में ‘खामेनेई विरोधी’ प्रदर्शन तेज: 21 प्रांतों में फैली विद्रोह की आग, अब तक 7 की मौत

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तेहरान. ईरान में नए साल की शुरुआत भारी अशांति और हिंसा के साथ हुई है। पिछले पांच दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों ने अब देशव्यापी ‘तख्तापलट’ की मांग का रूप ले लिया है। देश के 31 में से 21 प्रांतों में प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं और सीधे तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को चुनौती दे रहे हैं।

प्रदर्शनों का मुख्य कारण: आर्थिक बदहाली

इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत रविवार (28 दिसंबर, 2025) को तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई थी। ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ के ऐतिहासिक गिरावट और 40% से अधिक की महंगाई दर ने आम नागरिकों का जीना दूभर कर दिया है। लोग बुनियादी जरूरतों, जैसे रोटी और दवाइयों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ सड़कों पर उतरे, लेकिन जल्द ही यह गुस्सा सत्ता विरोधी नारों में बदल गया।

‘खामेनेई मुर्दाबाद’ के नारों से गूंजा ईरान

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों को “तानाशाह मुर्दाबाद” और “खामेनेई मुर्दाबाद” के नारे लगाते देखा जा रहा है। तेहरान, शिराज, इस्फहान और मशहद जैसे प्रमुख शहरों में लोग राजशाही के समर्थन में भी नारे लगा रहे हैं और पूर्व शाह रजा पहलवी के शासन को याद कर रहे हैं।

भारी हिंसा और मौतें

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में अब तक कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है।

  • लोरदेगान और अजना: इन शहरों में सबसे हिंसक संघर्ष हुआ है, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस थानों और सरकारी इमारतों में आग लगा दी।

  • सुरक्षा बलों की कार्रवाई: मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सुरक्षा बल सीधे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला रहे हैं। कई शहरों में आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने प्रदर्शनकारियों की आर्थिक मांगों को “जायज” बताया है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने सुरक्षा कारणों और ‘कड़ाके की ठंड’ का हवाला देते हुए कई प्रांतों में अचानक सार्वजनिक छुट्टी घोषित कर दी है, जिसे प्रदर्शनों को रोकने की एक कोशिश माना जा रहा है।

इंटरनेट और गिरफ्तारियां

ईरानी प्रशासन ने कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगा दी है ताकि प्रदर्शनकारी संगठित न हो सकें। अब तक सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि: यह 2022 के ‘महसा अमीनी’ आंदोलन के बाद ईरान के लिए सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती है। यदि आर्थिक हालात में तुरंत सुधार नहीं हुआ, तो यह आंदोलन खामेनेई शासन के लिए अस्तित्व का संकट बन सकता है।

ईरान का आर्थिक संकट: पतन की कगार पर अर्थव्यवस्था

मुद्रा का अवमूल्यन (Currency Collapse)

ईरानी रियाल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

  • विनिमय दर: अनौपचारिक बाजार में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत अब लाखों रियाल के बराबर हो गई है, जिससे विदेशी आयात लगभग असंभव हो गया है।

  • बचत खत्म: आम लोगों की सालों की जमा पूंजी कागजों के ढेर में बदल गई है।

रिकॉर्ड तोड़ महंगाई (Hyper-inflation)

जरूरी वस्तुओं की कीमतों में 40% से 60% तक की बढ़ोतरी देखी गई है:

  • खाद्य सामग्री: दूध, मांस और रोटी जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें पिछले 6 महीनों में दोगुनी हो गई हैं।

  • दवाइयों की कमी: अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और मुद्रा की कमी के कारण कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियों की जीवन रक्षक दवाइयां बाजारों से गायब हैं।

बेरोजगारी और भ्रष्टाचार

युवाओं में बेरोजगारी की दर 25% से ऊपर है। जनता का आरोप है कि देश का पैसा जनता के कल्याण के बजाय क्षेत्रीय संघर्षों (जैसे लेबनान और यमन) और सरकारी भ्रष्टाचार में खर्च किया जा रहा है।

प्रमुख शहरों की जमीनी स्थिति (Ground Reality) :

तेहरान (Tehran): सत्ता का केंद्र

  • स्थिति: राजधानी के ‘आजादी स्क्वायर’ और ‘तेहरान यूनिवर्सिटी’ के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात है।

  • हकीकत: यहाँ प्रदर्शनों का नेतृत्व मुख्य रूप से छात्र और मध्यम वर्ग कर रहा है। रात के समय लोग अपनी छतों से “तानाशाह मुर्दाबाद” के नारे लगाते हैं ताकि सीधे तौर पर पुलिस की पकड़ में न आएं।

मशहद (Mashhad): धार्मिक शहर में विद्रोह

  • स्थिति: मशहद, जिसे सत्ता का गढ़ माना जाता था, अब विरोध का प्रमुख केंद्र बन गया है।

  • हकीकत: यहाँ की गरीब आबादी सड़कों पर है। धार्मिक दीवारों पर खामेनेई विरोधी पोस्टर लगाए जा रहे हैं, जो सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है।

इस्फहान और अहवाज (Isfahan & Ahvaz): संसाधनों की लड़ाई

  • स्थिति: इन क्षेत्रों में पानी की कमी और पर्यावरणीय संकट ने आग में घी का काम किया है।

  • हकीकत: किसान और मजदूर वर्ग बड़ी संख्या में हड़ताल पर हैं। इस्फहान के स्टील वर्कर्स ने काम बंद कर दिया है, जिससे सरकार के राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है।

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