मुंबई । गुरुवार, 2 जुलाई 2026
भारत का अपना डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी सफलता के झंडे गाड़ रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में यूपीआई से होने वाले लेनदेन में सालाना आधार पर (Year-on-Year) 23 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही कुल मासिक ट्रांजैक्शन की संख्या 22.72 अरब (22.72 Billion) के पार पहुंच गई है।
यदि हम कुल वैल्यू या मूल्य की बात करें तो जून के महीने में यूपीआई के जरिए 28.92 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है, जो पिछले साल इसी महीने के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है।
जून में प्रतिदिन कितने का हुआ लेनदेन? (दैनिक औसत ने छुआ आसमान)
हालांकि मई के 31 दिनों के मुकाबले जून में कुल ट्रांजैक्शन (22.72 अरब) मामूली रूप से कम रहा (मई में यह रिकॉर्ड 23.20 अरब था), लेकिन इसका असल कारण जून महीने का छोटा होना (30 दिन) था। यदि प्रतिदिन के औसत को देखें, तो जून 2026 ने इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:
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प्रतिदिन लेनदेन की संख्या: जून में रोजाना औसतन 75.7 करोड़ लेनदेन प्रोसेस किए गए (जबकि मई में यह 74.8 करोड़ था)।
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प्रतिदिन लेनदेन की वैल्यू: जून के महीने में प्रतिदिन औसतन 96,405 करोड़ रुपए के ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए।
यह दैनिक औसत दिखाता है कि आम भारतीय नागरिक अब चाय की टपरी से लेकर बड़े मॉल तक, हर छोटे-बड़े भुगतान के लिए पूरी तरह यूपीआई पर निर्भर हो चुका है।
10 सालों में 12,000 गुना की ऐतिहासिक बढ़त
आज से ठीक 10 साल पहले जब आम आदमी को डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए यूपीआई की शुरुआत की गई थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह भारत की तकदीर बदल देगा।
वित्त वर्ष 2016-17 में जहां पूरे साल में महज 2 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए थे, वहीं हाल ही में समाप्त हुए वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ के पार पहुंच गया। यानी केवल एक दशक में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में लगभग 12,000 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है।
यूपीआई कितने देशों में उपलब्ध है? (वैश्विक मंच पर गूंज)
भारतीय फिनटेक सेक्टर की यह ताकत अब केवल देश के भीतर सीमित नहीं है। ताजा अपडेट्स के अनुसार, यूपीआई अब दुनिया के 9 देशों में चालू और स्वीकार्य हो चुका है। इनमें शामिल हैं:
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यूएई (UAE)
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सिंगापुर
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फ्रांस
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मॉरीशस
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श्रीलंका
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भूटान
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नेपाल
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कतर
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कंबोडिया (और हाल ही में ग्रीस में भी इसकी शुरुआत की रूपरेखा तैयार हुई है)
हाल ही में एनपीसीआई ने विदेशी दौरों पर जाने वाले भारतीयों की सहूलियत के लिए एचएसबीसी (HSBC) इंडिया और जेपी मॉर्गन पेमेंट्स के साथ एक बड़ी साझेदारी की है, जिससे अब विदेशों में भी रीयल-टाइम फॉरेक्स (FX) कंवर्जन के साथ तुरंत पेमेंट करना बेहद पारदर्शी और आसान हो गया है।
अमेरिकी सांसदों ने यूपीआई को लेकर क्या बोला?
भारत के इस आधुनिक पब्लिक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की गूंज अब अमेरिकी संसद (US Congress) तक पहुंच चुकी है। हाल ही में अमेरिका के पेमेंट सिस्टम के भविष्य और उसे आधुनिक बनाने को लेकर ‘हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी’ की ‘फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस सब-कमेटी’ में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।
इस दौरान अमेरिकी सांसदों ने भारत के यूपीआई का विशेष रूप से उदाहरण दिया। उन्होंने चर्चा की कि कैसे भारत सरकार द्वारा तैयार किया गया यह ओपन पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट सेक्टर (जैसे फोनपे, गूगल पे) में इनोवेशन को बढ़ावा देने में पूरी तरह सफल रहा है। अमेरिकी फिनटेक कंपनियों और सांसदों ने मांग की है कि अमेरिका को भी अपने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में बदलाव करना चाहिए ताकि वहां की गैर-बैंकिंग कंपनियों को फेडरल रिजर्व के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीधी पहुंच मिल सके और वे बिचौलियों पर निर्भर न रहें।
यूपीआई ट्रांजैक्शन न्यू रूल्स 2026: सुरक्षा और स्पीड पर फोकस
एनपीसीआई और आरबीआई ने साल 2026 में यूपीआई को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
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टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA): 1 अप्रैल 2026 से डिजिटल भुगतानों को सुरक्षित करने के लिए कम से कम एक डायनेमिक सुरक्षा उपाय अनिवार्य कर दिया गया है।
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ट्रांजैक्शन लिमिट: सामान्य पीयर-टू-पीयर (P2P) लेनदेन के लिए दैनिक सीमा ₹1 लाख रखी गई है, जबकि टैक्स भुगतान, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे खास क्षेत्रों के लिए इसे बढ़ाकर ₹10 लाख तक किया गया है।
भारत का यह डिजिटल मॉडल आज पूरी दुनिया के लिए एक गाइडबुक बन चुका है। जो सिस्टम कभी देश के भीतर कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए बना था, वह आज वैश्विक वित्तीय नीतियों को प्रभावित कर रहा है।
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