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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब विदेश गए पुजारी नहीं कर पाएंगे ‘गर्भगृह’ में प्रवेश, जानें क्या है नया नियम

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अमरावती | रविवार, 5 अप्रैल 2026

अमरावती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के मंदिरों की पवित्रता और प्राचीन परंपराओं को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। न्यायमूर्ति जस्टिस निम्मगड्डा वेंकटेश्वरलू ने आदेश दिया है कि जो पुजारी विदेश यात्रा कर चुके हैं, उन्हें अब मंदिरों के ‘गर्भगृह’ (Sanctum Sanctorum) में प्रवेश करने या मुख्य पूजा अर्चना करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मंदिरों का संचालन पूरी तरह से आगम शास्त्र और स्थापित धार्मिक परंपराओं के अनुसार ही होना चाहिए।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला विजयवाड़ा के प्रसिद्ध कनक दुर्गा मंदिर (श्री दुर्गा मल्लेश्वर स्वामीवरला मंदिर) के एक पुजारी, सुब्रह्मण्यम द्वारा दायर याचिका के बाद चर्चा में आया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2010 में जारी सरकारी सर्कुलर के बावजूद, कई पुजारी विदेश से लौटने के बाद भी गर्भगृह में प्रवेश कर रहे हैं और अनुष्ठान कर रहे हैं, जो धार्मिक मान्यताओं का उल्लंघन है।

श्रृंगेरी शारदा पीठम के कड़े नियम लागू

कोर्ट ने अपने आदेश में श्रृंगेरी शारदा पीठम द्वारा निर्धारित मानकों और धार्मिक परिषद के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया है। नए नियमों के अनुसार, गर्भगृह में पूजा के लिए निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य होंगी:

  1. नियमित अनुष्ठान: पुजारी को प्रतिदिन तीन समय की ‘संध्या वंदना’ और गुरु मंत्र का जाप करना अनिवार्य है।

  2. वैदिक अनुशासन: निरंतर वैदिक अध्ययन और सात्विक जीवनशैली का पालन करना होगा।

  3. भौगोलिक पाबंदी: आध्यात्मिक शुद्धता बनाए रखने के लिए विदेश यात्रा (समुद्र पार यात्रा) को गर्भगृह में प्रवेश के लिए अयोग्य माना गया है।


अब क्या बदल जाएगा?

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आंध्र प्रदेश के बंदोबस्ती विभाग (Endowment Department) को अब सख्त कदम उठाने होंगे:

  • पुजारियों की प्रोफाइलिंग: विभाग अब पुजारियों के पासपोर्ट और यात्रा इतिहास की जांच कर सकता है।

  • कार्यक्षेत्र में बदलाव: जो पुजारी विदेश जा चुके हैं, उन्हें मंदिर से निकाला नहीं जाएगा, बल्कि उनकी ड्यूटी मंदिर के बाहरी अनुष्ठानों या प्रशासनिक कार्यों तक सीमित कर दी जाएगी।

  • आगम शास्त्र का सख्ती से पालन: राज्य के सभी प्रमुख मंदिरों (जैसे तिरुपति, विजयवाड़ा, श्रीशैलम) में पारंपरिक नियमों को फिर से कड़ाई से लागू किया जाएगा।

न्यायालय की टिप्पणी: “धार्मिक अनुष्ठानों में परंपराओं का स्थान सर्वोपरि है। यदि कोई पुजारी निर्धारित आध्यात्मिक अनुशासन को तोड़ता है, तो वह गर्भगृह की मर्यादा के अनुसार पूजा करने का अधिकार खो देता है।”

मुख्य बिंदु:

  • आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने 2010 के एंडोमेंट विभाग के सर्कुलर को सख्ती से लागू करने का दिया आदेश।

  • श्रृंगेरी शारदा पीठम के आध्यात्मिक मानकों को बनाया गया आधार।

  • विदेश यात्रा कर चुके पुजारी केवल मंदिर परिसर के बाहर के अनुष्ठानों में ले सकेंगे हिस्सा।

निष्कर्ष

यह आदेश न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इसे धार्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, आधुनिक दौर में इस फैसले पर पुजारियों के एक वर्ग के बीच बहस भी छिड़ सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए विदेश यात्राएं करते हैं।

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