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मथुरा: 2 करोड़ से संवरेगा ‘ओढ़म वाली मैया’ का दरबार, पर्यटन मानचित्र पर चमकेगा यह प्राचीन सिद्ध पीठ

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मथुरा | रविवार, 5 अप्रैल 2026

कान्हा की नगरी मथुरा अब केवल बांके बिहारी और जन्मभूमि तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण अंचलों में स्थित प्राचीन सिद्ध पीठों को भी वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में, सौंख मार्ग स्थित ओढ़म सींगापट्टी गांव की अगाध आस्था का केंद्र ‘ओढ़म वाली मैया मंदिर’ अब नए और भव्य स्वरूप में नजर आएगा। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने मंदिर के कायाकल्प के लिए 2 करोड़ रुपये का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा मैया का धाम

पर्यटन विभाग की इस योजना का मुख्य उद्देश्य यहाँ आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है। विभाग के ब्लूप्रिंट के अनुसार, मंदिर परिसर में निम्नलिखित कार्य कराए जाएंगे:

  • भव्य सत्संग हॉल: धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए एक विशाल और आधुनिक हॉल का निर्माण।

  • स्मार्ट लाइटिंग: पूरे मंदिर परिसर और पहुंच मार्ग को LED लाइटिंग से सुसज्जित किया जाएगा, जिससे रात के समय भी मंदिर की आभा देखते ही बनेगी।

  • स्वच्छता और सुविधा: शुद्ध पेयजल के लिए वाटर कूलर और आधुनिक शौचालय ब्लॉक का निर्माण होगा।

  • लैंडस्केपिंग और सिटिंग: परिसर में सुंदर बेंच और छायादार स्थल विकसित किए जाएंगे ताकि बुजुर्ग और दूर-दराज से आए भक्त सुकून से बैठ सकें।

पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिलेगी उड़ान

जिला पर्यटन अधिकारी हेमंत कुमार शर्मा ने बताया कि मथुरा-वृंदावन आने वाले पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी को देखते हुए ग्रामीण पर्यटन केंद्रों को विकसित करना अनिवार्य हो गया है। ओढ़म वाली मैया मंदिर के जीर्णोद्धार से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

पौराणिक कथा: जब नगरकोट से चलकर यहाँ रुकीं ‘मैया’

ओढ़म वाली मैया का इतिहास अत्यंत रोचक और चमत्कारी माना जाता है। मंदिर की मान्यता के अनुसार:

  1. सैकड़ों वर्ष पहले एक अनन्य भक्त हिमाचल के नगरकोट से देवी की प्रतिमा को अपने सिर पर रखकर लाया था।

  2. मैया ने भक्त को वचन दिया था कि जहाँ वह पहली बार प्रतिमा को नीचे रखेगा, वे वहीं स्थापित हो जाएंगी।

  3. ओढ़म सींगापट्टी पहुँचने पर विश्राम के लिए जैसे ही भक्त ने प्रतिमा नीचे रखी, मैया वहाँ से टस-से-मस नहीं हुईं।

    तब से यह स्थान ‘ओढ़म वाली मैया’ के नाम से विख्यात हुआ और आज यहाँ राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक से भक्त अपनी मनोकामना लेकर आते हैं।

ब्रज विकास का नया अध्याय

मथुरा के विकास के लिए यूपी सरकार के 2026-27 के बजट में भी ब्रज सर्किट के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। ओढ़म वाली मैया मंदिर का यह कायाकल्प इसी बड़ी योजना का हिस्सा है, जिससे मथुरा-सौंख-गोवर्धन बेल्ट में धार्मिक पर्यटन का एक नया हब तैयार होगा।

मुख्य बिंदु:

  • मथुरा-सौंख मार्ग स्थित ओढ़म वाली मैया मंदिर के लिए 2 करोड़ का बजट मंजूर।

  • पर्यटन विभाग बनाएगा भव्य हॉल, LED लाइटिंग और आधुनिक जन-सुविधाएं।

  • नगरकोट से आई प्रतिमा और भक्त के अटूट विश्वास की है सदियों पुरानी गाथा।

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