चेन्नई। 05 अप्रैल, 2026
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। इस चुनावी शोर के बीच सबसे अधिक चर्चा सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) के “युवराज” और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की बदली हुई कार्यशैली को लेकर हो रही है। कभी ‘सनातन’ विरोधी बयानों से सुर्खियों में रहने वाले उदयनिधि अब मंदिरों की दहलीज पर माथा टेकते नजर आ रहे हैं, जिसे राजनीतिक विश्लेषक एक बड़ी रणनीतिक तब्दीली मान रहे हैं।
नामांकन से पहले भक्ति का मार्ग
हाल ही में अपने निर्वाचन क्षेत्र चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी से पर्चा दाखिल करने से पहले उदयनिधि स्टालिन ने एक विशाल रोड शो किया। इस दौरान उन्होंने चेन्नई के प्रसिद्ध सेनगेनिअम्मन मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की। दिलचस्प बात यह रही कि उनके साथ वरिष्ठ नेता और सांसद दयानिधि मारन भी मौजूद थे। नास्तिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी के शीर्ष नेता का यह धार्मिक अवतार विपक्ष के साथ-साथ आम जनता के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
चुनावी शेड्यूल पर एक नजर
तमिलनाडु में लोकतंत्र का यह सबसे बड़ा उत्सव अपने अंतिम चरण में है:
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मतदान की तारीख: 23 अप्रैल, 2026
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परिणाम (Counting): 04 मई, 2026
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मुख्य मुकाबला: DMK (INDIA ब्लॉक) बनाम AIADMK (NDA) बनाम भाजपा और अभिनेता विजय की नई पार्टी TVK।
डैमेज कंट्रोल या नई रणनीति?
2023 में सनातन धर्म पर दिए गए उनके विवादित बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को एक बड़ा हथियार दे दिया था। जानकारों का मानना है कि उदयनिधि की हालिया मंदिर यात्राएं उसी “हिंदू विरोधी” छवि को धोने का एक प्रयास हैं।
“यह ‘द्रविड़ियन मॉडल 2.0’ है, जहाँ पार्टी सामाजिक न्याय के साथ-साथ बहुसंख्यक भावनाओं को भी साथ लेकर चलना चाहती है।” — स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक
भाजपा और AIADMK का कड़ा रुख
एक तरफ जहाँ उदयनिधि मंदिर जा रहे हैं, वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई इसे “चुनावी ढोंग” बता रहे हैं। दूसरी ओर, AIADMK नेता ई.के. पलानीस्वामी भी हाल ही में कपालेश्वर मंदिर में दर्शन कर अपनी धार्मिक सक्रियता बढ़ा चुके हैं। मुकाबला केवल सत्ता का नहीं, बल्कि अब धार्मिक पहचान और आस्था के प्रदर्शन का भी होता जा रहा है।
अभिनेता विजय की एंट्री ने बढ़ाई बेचैनी
सुपरस्टार विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) ने भी इस बार चुनावी मैदान में उतरकर समीकरण उलझा दिए हैं। विजय युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं, और उनकी उपस्थिति से वोट बैंक में सेंध लगने के डर ने DMK को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।
निष्कर्ष
क्या उदयनिधि का यह “सॉफ्ट हिंदुत्व” वाला अंदाज उन्हें सत्ता की कुर्सी दोबारा दिला पाएगा? या फिर भाजपा और AIADMK इस ‘हृदय परिवर्तन’ को जनता के सामने बेनकाब कर देंगे? इसका फैसला 4 मई को होने वाली मतगणना में साफ हो जाएगा।
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