बचपन से हमें स्कूल की किताबों, सामान्य ज्ञान और किस्से-कहानियों में यही पढ़ाया गया कि सिकंदर महान (Alexander the Great) एक ऐसा अजेय योद्धा था जिसने पूरी दुनिया को अपने कदमों में झुका दिया।
‘जो जीता वही सिकंदर’ जैसे मुहावरे आज भी हमारी भाषा और सोच का हिस्सा हैं।
लेकिन जब इतिहास को गहराई से परखा जाता है, तो यह सवाल उठता है—
क्या सिकंदर सच में विश्व विजेता था या यह छवि विजेताओं द्वारा लिखे गए इतिहास की देन है?
मिथक 1: सिकंदर ने पूरी दुनिया जीत ली थी
ऐतिहासिक सच्चाई
सिकंदर ने एक बड़ा साम्राज्य अवश्य खड़ा किया, लेकिन वह पूरी दुनिया तो क्या, उस समय की ज्ञात दुनिया का भी सीमित भाग था।
उस दौर में:
- चीन और पूर्वी एशिया
- संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप
- यूरोप का अधिकांश भाग
- और अफ्रीका के गहरे क्षेत्र
उसकी पहुँच से पूरी तरह बाहर थे।
सिकंदर का साम्राज्य मुख्य रूप से:
- मैसेडोनिया
- ग्रीस
- मिस्र
- और फारस (आधुनिक ईरान)
तक सीमित था।
इतिहासकारों के अनुसार, भौगोलिक रूप से उसने पृथ्वी के कुल भूभाग के 5% से भी कम हिस्से पर प्रत्यक्ष शासन किया।
मिथक 2: भारत को सिकंदर ने जीत लिया था
ऐतिहासिक हकीकत
भारत में प्रवेश करते ही सिकंदर का सामना पंजाब के पराक्रमी शासक राजा पोरस (पुरुवास) से हुआ।
यह संघर्ष झेलम का युद्ध के नाम से इतिहास में दर्ज है।
इस युद्ध में:
- भारतीय युद्धक हाथियों ने यूनानी सेना को पहली बार वास्तविक भय का अनुभव कराया
- सिकंदर की सेना को भारी क्षति हुई
- कई अनुभवी यूनानी सेनापति मारे गए
हालाँकि यूनानी इतिहासकार इस युद्ध को सिकंदर की “रणनीतिक जीत” बताते हैं,
लेकिन वे यह भी स्वीकार करते हैं कि:
- उसकी सेना बुरी तरह थक चुकी थी
- और राजा पोरस के साहस, नेतृत्व व आत्मसम्मान से स्वयं सिकंदर प्रभावित हुआ
वह सच, जिसे अक्सर छुपाया गया: मगध का भय
सिकंदर की भारत से वापसी का सबसे बड़ा कारण केवल राजा पोरस नहीं था,
बल्कि मगध के नंद साम्राज्य की अपार सैन्य शक्ति भी थी।
उस समय मगध पर धनानंद का शासन था और नंद साम्राज्य एशिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में गिना जाता था।
नंद साम्राज्य की सैन्य शक्ति
प्राचीन स्रोतों के अनुसार:
- लगभग 2 लाख पैदल सैनिक
- 80,000 घुड़सवार
- 8,000 रथ
- और 6,000 से अधिक युद्धक हाथी
जब सिकंदर की सेना व्यास नदी के तट पर पहुँची और आगे ऐसी विशाल सेना की जानकारी मिली,
तो यूनानी सैनिकों का मनोबल पूरी तरह टूट गया।
व्यास नदी पर टूटा ‘अजेयता’ का भ्रम
लगातार युद्धों, गर्म जलवायु, अनजान भूभाग और भारतीय सेनाओं के आतंक से थकी यूनानी सेना ने आगे बढ़ने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
यह इतिहास का वह क्षण था जहाँ:
- एक कथित ‘विश्व विजेता’
- अपनी ही सेना के विद्रोह के आगे विवश हो गया
“जिस सिकंदर को अजेय कहा जाता था,
उसकी सेना भारतीय शौर्य और मगध की ताकत की चर्चा सुनकर ही आगे बढ़ने से डर गई।”
यहीं से सिकंदर का भारत अभियान समाप्त हो गया।
विजेता कौन?
सिकंदर निस्संदेह एक कुशल सेनापति था,
लेकिन उसे ‘विश्व विजेता’ कहना ऐतिहासिक अतिशयोक्ति है।
वह:
- भारत को जीत नहीं सका
- मगध की सीमा तक पहुँचने का साहस नहीं कर पाया
- और व्यास नदी से आगे बढ़े बिना लौट गया
सच यही है कि भारतीय प्रतिरोध ने उस तूफान को रोक दिया,
जिसने पश्चिमी दुनिया को हिला दिया था।
पाठकों के लिए सवाल
क्या आपको लगता है कि हमारे इतिहास में राजा पोरस जैसे भारतीय नायकों को वह सम्मान और स्थान मिला, जिसके वे वास्तव में हकदार थे?
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