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भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता 2026: टैरिफ युद्ध के बाद नई आर्थिक साझेदारी का उदय

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का रिप्रेजेंटेशन।

7 फरवरी 2026 को भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुआ Interim Trade Deal दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक और युगांतकारी मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। करीब एक साल तक चले टैरिफ तनाव और व्यापारिक अनिश्चितता के बाद यह समझौता भारतीय निर्यातकों, MSME सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है।

यह समझौता 7 फरवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे से प्रभावी हो चुका है, जिससे इसके तात्कालिक प्रभाव वैश्विक बाजारों में दिखने लगे हैं।

🔻 टैरिफ में भारी कटौती: भारतीय निर्यात को सीधा फायदा

इस अंतरिम व्यापार समझौते की सबसे अहम उपलब्धि अमेरिका द्वारा टैरिफ में ऐतिहासिक कमी है:

  • 50% से घटकर 18%: भारतीय उत्पादों पर लागू प्रभावी कुल अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है।
  • 25% पेनल्टी टैरिफ खत्म: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूसी तेल आयात के कारण लगाया गया अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया।
  • ज़ीरो टैरिफ सेक्टर:
    • जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स
    • रत्न एवं आभूषण (विशेषकर हीरा उद्योग)
    • विमान और एयरोस्पेस पुर्जे

इन क्षेत्रों पर अब 0% ड्यूटी लागू होगी, जिससे भारतीय कंपनियों की लागत घटेगी और अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

🌾 भारत की ‘रेड लाइन्स’: कृषि और डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित

भारत ने इस समझौते में अपने संवेदनशील कृषि हितों से कोई समझौता नहीं किया, जो घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है:

  • डेयरी और मुख्य फसलें बाहर: दूध, पनीर, गेहूं, चावल और मक्का को समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है।
  • सीमित कृषि रियायतें: केवल उन्हीं अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम किए गए हैं जिनसे भारतीय किसानों को सीधा नुकसान नहीं होता, जैसे—
    • बादाम (Tree Nuts)
    • ताजे फल
    • सोयाबीन तेल
    • पशु आहार (Sorghum)

यह नीति भारत की कृषि सुरक्षा और खाद्य आत्मनिर्भरता को बनाए रखने में मददगार मानी जा रही है।

💰 $500 बिलियन की रणनीतिक प्रतिबद्धता

इस अंतरिम डील के तहत भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से लगभग $500 बिलियन मूल्य के उत्पादों और सेवाओं की खरीद की योजना बनाई है। इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ऊर्जा क्षेत्र: LNG और कच्चा तेल
  • विमानन व रक्षा: यात्री विमान और रक्षा उपकरण
  • हाई-टेक सेक्टर: GPUs, डेटा सेंटर और एडवांस कंप्यूटिंग उपकरण
  • औद्योगिक कच्चा माल: कोकिंग कोल

यह प्रतिबद्धता भारत–अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक मजबूती भी प्रदान करती है।

यह भी पढ़ें : ‘मोदी और मैं काम करके दिखाते हैं’ – टैरिफ कटौती के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, भारतीय निर्यातकों की चांदी

🤖 तकनीकी और कूटनीतिक असर

  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त:
    18% टैरिफ के साथ भारतीय उत्पाद अब वियतनाम (20%) और बांग्लादेश (19%) की तुलना में अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो गए हैं।
  • iCET को नई गति:
    Critical and Emerging Technologies यानी iCET के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और एडवांस टेक्नोलॉजी में सहयोग और गहरा होगा।
  • रूस–अमेरिका संतुलन:
    विशेषज्ञों के अनुसार भारत ने रूसी तेल से अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखते हुए अमेरिकी बाजार तक पहुंच का संतुलन साधने में कूटनीतिक सफलता हासिल की है।

📈 किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ?

क्षेत्र संभावित प्रभाव
टेक्सटाइल व गारमेंट्स निर्यात में 20–25% तक वृद्धि की संभावना
फार्मास्यूटिकल्स जेनेरिक दवाओं पर ज़ीरो टैरिफ से अमेरिकी बाजार में बढ़त
MSME व हस्तशिल्प अमेरिका के $30 ट्रिलियन उपभोक्ता बाजार तक आसान पहुंच
ऑटो पार्ट्स विशेष Preferential Quota से निर्यात को प्रोत्साहन

🔔 ताज़ा अपडेट

  • यह अंतरिम व्यापार समझौता 7 फरवरी 2026, सुबह 10:30 बजे से लागू है।
  • अमेरिकी सीमा शुल्क विभाग (CBP) ने उन भारतीय कंपनियों के लिए रिफंड प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिन्होंने हाल के महीनों में अतिरिक्त 25% पेनल्टी टैरिफ का भुगतान किया था।

भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता 2026 केवल एक व्यापारिक डील नहीं, बल्कि निर्यात, तकनीक और भू-आर्थिक संतुलन की दिशा में भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने वाला कदम है। कृषि सुरक्षा बनाए रखते हुए बाजार पहुंच हासिल करना इस समझौते की सबसे बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है।

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