लखनऊ. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के फरधान थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ के मोहम्मदपुर गांव में एक हिंदू परिवार ने पड़ोसी मुस्लिम परिवार के कथित उत्पीड़न और पुलिस की निष्क्रियता से परेशान होकर अपने घर पर ‘मकान बिक्री’ का नोटिस चस्पा कर दिया है। पीड़ित परिवार ने गांव छोड़ दिया है और अब पुलिस अधीक्षक (SP) से न्याय की गुहार लगाई है।
धार्मिक स्थल को अपवित्र करने का आरोप
मोहम्मदपुर निवासी पीड़ित प्रदीप वर्मा का आरोप है कि उनके पड़ोसी इस्माइल अली और उनका परिवार लंबे समय से उन्हें प्रताड़ित कर रहा है। प्रदीप के अनुसार, आरोपी जानबूझकर उनके घर के सामने स्थित शिव मंदिर और पास के कुएं में मांस के टुकड़े और हड्डियां फेंकते हैं। कई बार विरोध करने और समझाने के बावजूद यह हरकतें बंद नहीं हुईं, जिससे इलाके में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी रहती थी।
4 मार्च को हुई हिंसक झड़प
मामले ने तब तूल पकड़ा जब 4 मार्च को फिर से मंदिर और कुएं में मांस फेंका गया। जब प्रदीप वर्मा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई, तो आरोपी पक्ष (इस्माइल अली, वारिश अली, तहबान अली और इश्तियाक) ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
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इस हमले में प्रदीप वर्मा के सिर में गंभीर चोट आई।
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बीच-बचाव करने आईं परिवार की महिलाएं, रेनू वर्मा और कलावती भी इस मारपीट में घायल हो गईं।
पुलिस पर लापरवाही के आरोप और पलायन
पीड़ित परिवार का सबसे बड़ा आरोप स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर है। प्रदीप का कहना है कि घटना के तुरंत बाद तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने दोषियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। पुलिस के ढुलमुल रवैये से डरे और आहत होकर परिवार ने घर में ताला लगा दिया और दरवाजे पर “यह मकान बिकाऊ है” का पोस्टर लगाकर गांव से पलायन कर दिया।
प्रशासनिक एक्शन: दरोगा पर गिरी गाज
शनिवार को जब यह मामला पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में आया और पीड़ित परिवार ने उनसे मुलाकात की, तो महकमे में हड़कंप मच गया।
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दरोगा पर कार्रवाई: लापरवाही बरतने के आरोप में नकहा पिपरी चौकी पर तैनात दरोगा जुनैद को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।
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मुकदमा दर्ज: फरधान थाना प्रभारी दिलीप कुमार चौबे ने पुष्टि की है कि पीड़ित की तहरीर पर नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
वर्तमान स्थिति
गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात है। हालांकि, थाना प्रभारी का कहना है कि उन्हें मकान बिक्री के नोटिस की आधिकारिक जानकारी अभी नहीं मिली है, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
बड़ी बात: यह घटना उत्तर प्रदेश में ‘पड़ोसी विवाद’ और ‘धार्मिक संवेदनशीलता’ के बीच पुलिस की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती है।
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