लोड हो रहा है...

ऑस्ट्रेलिया: सीरिया से लौटीं ‘ISIS ब्राइड्स’ पर मानवता के खिलाफ अपराध का शिकंजा, 10,000 डॉलर में गुलाम खरीदने का आरोप

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मेलबर्न । शुक्रवार, 8 मई 2026

सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) के पतन के बाद वर्षों तक शरणार्थी कैंपों में रहने वाली ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं की घर वापसी अब उनके लिए कानूनी दुःस्वप्न बन गई है। मेलबर्न पुलिस ने दो महिलाओं—53 वर्षीय कौसर अब्बास और उनकी 31 वर्षीय बेटी ज़ैनब अहमद—पर एक महिला को ‘गुलाम’ बनाकर रखने और मानवता के खिलाफ अपराध करने के संगीन आरोप लगाए हैं।

मानवता के खिलाफ अपराध और गुलामी के आरोप

जांचकर्ताओं के अनुसार, ये महिलाएं 2014 में अपने परिवार के साथ सीरिया गई थीं। ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस (AFP) का आरोप है कि सीरिया में रहने के दौरान कौसर अब्बास ने लगभग 10,000 अमेरिकी डॉलर का भुगतान कर एक महिला को ‘गुलाम’ के रूप में खरीदा था। उनकी बेटी ज़ैनब पर आरोप है कि उसने जानबूझकर उस महिला को अपने घर में बंधक बनाए रखा और उसे काम करने के लिए मजबूर किया।

काउंटर-टेररिज्म चीफ स्टीफन नट ने कहा, “इन महिलाओं पर लगे आरोप केवल आतंकी संगठन की सदस्यता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये सीधे तौर पर मानवता के खिलाफ अपराध (Crimes against humanity) और दासता से जुड़े हैं।”

गिरफ्तारी और अदालती कार्यवाही

यह समूह गुरुवार शाम कतर एयरवेज की फ्लाइट से मेलबर्न पहुँचा था। पुलिस ने एयरपोर्ट पर ही कार्रवाई करते हुए तीन महिलाओं को हिरासत में लिया:

  1. कौसर अब्बास (53): गुलाम व्यापार और गुलामी में संलिप्तता के आरोप। (संभावित सजा: 25 वर्ष)

  2. ज़ैनब अहमद (31): गुलाम रखने और अमानवीय व्यवहार के आरोप। (संभावित सजा: 25 वर्ष)

  3. जनई सफ़र (32): सिडनी में गिरफ्तार, प्रतिबंधित आतंकी क्षेत्र में प्रवेश और IS की सदस्यता के आरोप।

इन महिलाओं के साथ कुल 9 बच्चे भी वापस लौटे हैं, जिन्हें वर्तमान में सुरक्षात्मक निगरानी और पुनर्वास कार्यक्रमों में रखा गया है।

ऑस्ट्रेलिया में छिड़ी तीखी बहस

इन महिलाओं की वापसी ने देश में सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच एक बड़ी बहस छेड़ दी है। गृह मंत्री टोनी बर्की ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इन महिलाओं ने एक बर्बर संगठन का साथ देने का ‘भयानक फैसला’ किया था और अब उन्हें कानून का सामना करना ही होगा। वहीं, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कैंपों में नरकीय जीवन जी रहे बच्चों को वापस लाना एक मानवीय जिम्मेदारी थी।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • सज़ा का प्रावधान: कुछ प्रारंभिक रिपोर्टों में केवल आतंकी सदस्यता की बात कही गई थी, लेकिन ताज़ा कानूनी दस्तावेजों के अनुसार ‘गुलामी’ (Slavery) के आरोपों में 25 साल तक की अधिकतम सजा हो सकती है।

  • कानूनी स्थिति: ऑस्ट्रेलिया ने 2014 में रक्का (सीरिया) जैसे क्षेत्रों की यात्रा को अपराध घोषित किया था, जिससे इन महिलाओं पर केस चलाना आसान हो गया है।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।