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ईरान-इजरायल संघर्ष: महाविनाश की ओर बढ़ता पश्चिम एशिया, तीसरे विश्व युद्ध का खतरा

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इजरायल की एरो मिसाइल डिफेंस सिस्टम द्वारा ईरानी मिसाइलों को नष्ट करने का दृश्य।

तेल अवीव. पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी सैन्य संघर्ष अब अपने सबसे खतरनाक दौर में पहुँच गया है। पिछले 24 घंटों के भीतर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हुए सीधे सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर खड़ा कर दिया है। ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए बड़े मिसाइल हमले के बाद जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्रीय स्थिरता को पूरी तरह भंग कर दिया है।

ईरान का इजरायल पर ‘ऑपरेशन ऑनेस्ट प्रॉमिस’ का नया चरण

ताजा सैन्य घटनाक्रम में ईरान ने इजरायल के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे हैं।

  • प्रभावित क्षेत्र: तेल अवीव, हाइफा और नेगेव रेगिस्तान स्थित सैन्य हवाई अड्डों पर हमलों की खबर है।

  • इजरायल का रक्षा कवच: इजरायल की प्रसिद्ध ‘एरो’ (Arrow) और ‘डेविड्स स्लिंग’ रक्षा प्रणालियों ने अधिकांश खतरों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलों के गिरने से सैन्य बुनियादी ढांचे को “सीमित लेकिन महत्वपूर्ण” नुकसान पहुँचा है।

  • नागरिकों की स्थिति: पूरे इजरायल में एयर-रेड सायरन गूंज रहे हैं और लाखों नागरिकों को भूमिगत बंकरों में शरण लेनी पड़ी है।

अमेरिका और इजरायल की संयुक्त जवाबी कार्रवाई: ईरान के सैन्य ठिकानों पर प्रहार

ईरान के दुस्साहस का जवाब देने के लिए अमेरिका और इजरायल ने एक संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया है। रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक है।

प्रमुख सैन्य अपडेट्स:

  1. मिसाइल लॉन्च साइट्स की तबाही: अमेरिकी बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स और इजरायली एफ-35 लड़ाकू विमानों ने ईरान के पारचिन (Parchin) और शाहरूद (Shahroud) स्थित मिसाइल निर्माण इकाइयों को निशाना बनाया।

  2. नेतृत्व पर दबाव: तेहरान सहित ईरान के कई प्रमुख शहरों में जोरदार धमाके सुने गए हैं। सूत्रों का दावा है कि गठबंधन सेना का लक्ष्य ईरान की परमाणु क्षमता और कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर को पंगु बनाना है।

  3. साइबर युद्ध: सैन्य हमलों के साथ-साथ ईरान के बिजली ग्रिड और संचार प्रणालियों पर बड़े पैमाने पर साइबर हमले भी किए गए हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट: $100 के पार कच्चा तेल

इस युद्ध का सबसे घातक असर वैश्विक बाजार पर दिखाई दे रहा है। निवेशकों के बीच डर का माहौल है, जिससे आर्थिक संकेतक अस्थिर हो गए हैं।

  • कच्चा तेल (Crude Oil): होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। यदि यह जलमार्ग बंद होता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ठप हो सकती है।

  • सोना (Gold): सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोने की कीमतें अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं।

  • शेयर बाजार: भारत के निफ्टी/सेंसेक्स सहित न्यूयॉर्क और लंदन के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत की चिंता

यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है। जर्मनी और फ्रांस के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यह संघर्ष “अनियंत्रित” हो सकता है।

भारत का रुख: भारत सरकार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय ने खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए ‘एडवाइजरी’ जारी की है। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और अपने नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

क्या यह लंबे युद्ध की शुरुआत है?

पिछले 24 घंटों की घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि कूटनीतिक रास्ते बंद होते जा रहे हैं। ईरान में सत्ता परिवर्तन की अटकलों और इजरायल की आक्रामक सैन्य नीति ने इस क्षेत्र को बारूद के ढेर पर बिठा दिया है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्या विश्व एक और विनाशकारी युद्ध की ओर बढ़ रहा है।

पश्चिम एशिया संकट और भारत पर इसका प्रभाव – मातृभूमि समाचार

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