भोपाल | शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026
मध्य प्रदेश के गुना जिले से धर्मांतरण के गंभीर आरोपों ने एक बार फिर राज्य में ‘धार्मिक स्वतंत्रता कानून’ की सख्ती और जमीन पर हो रही गतिविधियों के बीच के टकराव को सुर्खियों में ला दिया है। ईस्टर के मौके पर आयोजित एक सामूहिक सभा, जिसे ‘चंगाई सभा’ का नाम दिया गया, अब प्रशासन की जांच के दायरे में है।
1. क्या है पूरा मामला? (The Incident)
गुना के मोहनपुर खुर्द गांव में ईस्टर के पावन अवसर पर एक विशाल प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। स्थानीय सूत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार, इस सभा में करीब 300 से 400 लोग जुटे थे, जिनमें अधिकांश जनजातीय (भील समुदाय) समाज के थे।
आरोप है कि यहाँ प्रार्थना के माध्यम से असाध्य बीमारियों को ठीक करने और नशा छुड़ाने का दावा किया जा रहा था। इस दौरान पास्टर उत्तम बरेला द्वारा लोगों के सिर पर हाथ रखकर इलाज का दावा करने के वीडियो सामने आने के बाद हंगामा खड़ा हो गया।
2. प्रलोभन की नई रणनीति: ‘भोज और बलि’
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह खुलासा हुआ कि सभा के बाद एक विशाल सामूहिक भोज का आयोजन किया गया था।
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दावत का विवरण: बताया जा रहा है कि आयोजन के लिए 2 बकरों और लगभग 40 मुर्गों का इंतज़ाम किया गया था।
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हिंदू संगठनों का आरोप: संगठनों का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक सभा नहीं, बल्कि गरीब और अशिक्षित ग्रामीणों को ‘भोजन और अंधविश्वास’ के जाल में फंसाकर धर्मांतरण की एक सुनियोजित कोशिश थी।
3. कानून की नजर: MP में सजा का कड़ा प्रावधान
मध्य प्रदेश में ‘धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021’ लागू है, जो प्रलोभन, बल या धोखाधड़ी से किए गए धर्मांतरण को अपराध मानता है।
अहम तथ्य: इस कानून के तहत अगर धर्मांतरण के लिए “लालच” (जैसे मुफ्त इलाज या आर्थिक मदद का झूठा वादा) दिया जाता है, तो दोषियों को 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
4. स्थानीय लोगों का बयान और रहस्यमय चुप्पी
ग्रामीण मेहंदी बाई जैसे कई लोगों ने स्वीकार किया कि वे वहां इलाज की उम्मीद में गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि जब अस्पतालों से राहत नहीं मिली, तो उन्हें बताया गया कि “प्रार्थना” सब ठीक कर देगी। हालांकि, जैसे ही विवाद बढ़ा और वीडियो वायरल हुए, आयोजन से जुड़े मुख्य लोग मौके से फरार हो गए, जिससे संदेह और गहरा गया है।
5. प्रशासन की कार्रवाई: क्या होगा अगला कदम?
गुना जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) या विशेष दल के माध्यम से जांच के संकेत दिए हैं।
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जांच का केंद्र: पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में ‘मन परिवर्तन’ के नाम पर डेमोग्राफिक बदलाव की कोशिश की गई है।
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पुराना रिकॉर्ड: गौर करने वाली बात है कि साल 2017 में भी इसी क्षेत्र में अवैध निर्माण और संदिग्ध गतिविधियों के कारण कुछ मिशनरी केंद्रों को सील किया गया था।
निष्कर्ष: यह घटना केवल एक विवाद नहीं बल्कि यह सवाल उठाती है कि स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में ‘आस्था के नाम पर अंधविश्वास’ कितनी आसानी से जगह बना लेता है। प्रशासन की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह केवल ईस्टर की प्रार्थना थी या धर्मांतरण का कोई बड़ा सिंडिकेट।
Matribhumisamachar


