सोमवार, मई 18 2026 | 12:26:27 PM
Breaking News
Home / अंतर्राष्ट्रीय / US-Iran Talks: ईरान की दो-टूक ‘गर्दन पर तलवार रखकर बात नहीं होगी’, क्या ट्रंप का मास्टर प्लान होगा फेल?

US-Iran Talks: ईरान की दो-टूक ‘गर्दन पर तलवार रखकर बात नहीं होगी’, क्या ट्रंप का मास्टर प्लान होगा फेल?

Follow us on:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का व्हाइट हाउस से प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए चित्र।

तेहरान | अपडेटेड : सोमवार, 20 अप्रैल 2026

दक्षिण एशिया की कूटनीतिक राजधानी बना इस्लामाबाद आज एक ऐतिहासिक लेकिन बेहद तनावपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन सोमवार शाम तक पाकिस्तान पहुँचने वाला है, तो दूसरी तरफ ईरान ने दो-टूक शब्दों में वार्ता की मेज पर आने से इनकार कर दिया है।

शहबाज शरीफ की 45 मिनट की ‘अंतिम कोशिश’ रही नाकाम

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रविवार देर रात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान से 45 मिनट तक फोन पर बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने ईरान को विश्वास दिलाने की कोशिश की कि पाकिस्तान एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा। हालांकि, पजेश्कियान ने स्पष्ट कर दिया कि “जब तक अमेरिका ईरान की गर्दन पर नाकेबंदी (Blockade) की तलवार लटकाए रखेगा, कोई शांति वार्ता संभव नहीं है।”

ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी व्यवहार को ‘धौंस जमाने वाला’ करार देते हुए कहा कि अमेरिका पर्दे के पीछे से सरप्राइज अटैक की फिराक में है।

ट्रंप का डेलिगेशन और ‘अंतिम प्रस्ताव’ की धमकी

व्हाइट हाउस ने अपने रुख में बड़ा बदलाव करते हुए साफ कर दिया है कि सुरक्षा चिंताओं के बावजूद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance), ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ इस्लामाबाद पहुँच रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट साझा करते हुए कहा:

“हम एक निष्पक्ष और उचित डील की पेशकश कर रहे हैं। अगर ईरान इसे स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के हर पावर प्लांट और हर पुल को तबाह कर देगा।”

क्या है इस्लामाबाद का ‘मास्टर प्लान’?

राजनयिक गलियारों में चर्चा है कि अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य बुधवार (22 अप्रैल) को समाप्त हो रहे संघर्षविराम (Ceasefire) को आगे बढ़ाना है। यदि आज और कल की शुरुआती बातचीत सफल रहती है, तो बुधवार को दोनों देशों की ओर से एक सिंबॉलिक सीजफायर का ऐलान किया जा सकता है।

मुख्य बाधाएं: जो वार्ता को बना रही हैं मुश्किल

  • आर्थिक नाकेबंदी: ईरान की पहली शर्त है कि अमेरिका 13 अप्रैल से लागू किए गए नौसैनिक ब्लॉकेड (Naval Blockade) को तुरंत खत्म करे।

  • अविश्वास की खाई: ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने पाकिस्तानी समकक्ष से बातचीत में कहा कि उनकी लीडरशिप बातचीत के मूड में नहीं है क्योंकि अमेरिका की कथनी और करनी में फर्क है।

  • परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने की प्रतिबद्धता दे, जिस पर ईरान फिलहाल सहमत नहीं है।

आज की स्थिति: क्या होगा आगे?

आज शाम जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद की धरती पर उतरेगा, तब सबकी नजरें ईरान के अगले कदम पर होंगी। क्या पाकिस्तान पर्दे के पीछे से ईरान को मनाने में सफल होगा, या फिर यह वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो जाएगी? यदि वार्ता विफल होती है, तो मध्य पूर्व में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ जाएगी।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की तस्वीर और भारत-नेपाल सीमा पर स्थित कस्टम चौकी का दृश्य, जहाँ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चेकिंग में ढील दी गई है।

भारत-नेपाल बॉर्डर पर ₹100 वाले कस्टम नियम पर सुप्रीम कोर्ट का ब्रेक, प्रधानमंत्री बालेन शाह सरकार को बड़ा झटका

काठमांडू । शनिवार, 16 मई 2026 भारत और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले …