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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियों को भारत लाने की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

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टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में रखे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कथित अस्थि-कलश का दृश्य।
नई दिल्ली । बुधवार, 12 अगस्त 2026
स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कथित अस्थियों को जापान से भारत वापस लाने का मुद्दा एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत के चौखट पर पहुंच गया है। नेताजी की बेटी अनिता बोस फाफ (Anita Bose Pfaff) द्वारा दायर एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों को नोटिस जारी कर उनका आधिकारिक पक्ष मांगा है।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने लिया संज्ञान

इस संवेदनशील और ऐतिहासिक मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की। इस पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्रालय एवं अन्य संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।

क्या है याचिकाकर्ता अनिता बोस फाफ का पक्ष?

अनिता बोस फाफ लंबे समय से अपने पिता के अवशेषों को सम्मानजनक तरीके से भारत वापस लाने की वकालत करती आ रही हैं। याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:
  1. टोक्यो के रेंकोजी मंदिर (Renkoji Temple, Tokyo) में दशकों से सुरक्षित रखे गए कथित अस्थि-अवशेषों को सम्मानपूर्वक भारत लाया जाए।
  2. भारत सरकार नेताजी की अंतिम इच्छा के अनुरूप उनके अवशेषों का भारतीय परंपराओं और पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने की व्यवस्था करे।
विशेष संदर्भ: इससे पूर्व मार्च 2026 में नेताजी के ग्रैंड-नेफ्यू आशीष रे की ओर से इसी विषय पर याचिका लगाई गई थी, जिस पर शीर्ष अदालत ने तृतीय पक्ष की याचिका मानकर विचार करने से मना कर दिया था। अदालत की टिप्पणी के बाद ही नेताजी की बेटी अनिता बोस फाफ ने स्वयं सीधी कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया।

रेंकोजी मंदिर और दशकों पुराना विवाद

18 अगस्त 1945 को ताइवान में हुए एक विमान हादसे में नेताजी के निधन का दावा किया जाता रहा है, जिसके बाद से उनकी अस्थियां जापान की राजधानी टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में रखी हुई हैं। हालांकि, भारत में दशकों से उनकी मृत्यु और इन अवशेषों की प्रामाणिकता को लेकर गहरा मतभेद और अलग-अलग जांच आयोगों (शाहनवाज़ कमेटी, खोसला आयोग, मुखर्जी आयोग) के परस्पर विरोधी निष्कर्ष रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र को जारी नोटिस का अर्थ यह नहीं है कि अस्थियों को तत्काल भारत लाने की अनुमति मिल गई है। यह केवल सरकार का रुख जानने और इस संवेदनशील मुद्दे पर विधिक प्रक्रिया शुरू करने का पहला कदम है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. सुप्रीम कोर्ट में नेताजी की अस्थियों को भारत लाने की याचिका किसने दायर की है?
उत्तर: यह याचिका नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुत्री अनिता बोस फाफ (Anita Bose Pfaff) ने दायर की है।
Q2. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कथित अस्थियां वर्तमान में कहाँ रखी हुई हैं?
उत्तर: ये कथित अस्थि-अवशेष जापान की राजधानी टोक्यो के प्रसिद्ध रेंकोजी मंदिर (Renkoji Temple) में रखे गए हैं।
Q3. मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पीठ में कौन-कौन से न्यायाधीश शामिल हैं?
उत्तर: इस पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत कर रहे हैं, तथा इसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं।

 

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सूचनात्मक एवं शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें प्रस्तुत तथ्य और समाचार विवरण अदालत की कार्यवाही एवं उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्ट्स पर आधारित हैं।
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