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देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का धमाका: जींद-सोनीपत रूट पर फाइनल ट्रायल शुरू, जानें कब से चलेगी ‘नमो ग्रीन रेल’

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जींद. भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रदूषण मुक्त यात्रा और ‘नेट ज़ीरो’ कार्बन उत्सर्जन की दिशा में भारत की पहली हाइड्रोजन गैस से चलने वाली ट्रेन (Namo Green Rail) अब अपने अगले चरण के ट्रायल के लिए जींद-सोनीपत ट्रैक पर पूरी तरह तैयार है। रेलवे सूत्रों के अनुसार, सोमवार से यह ट्रेन नियमित रूप से ट्रायल रन के लिए ट्रैक पर उतरेगी।

🚄 100 किमी/घंटा की रफ़्तार और RDSO का सख्त पहरा

रेलवे के रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की टीम इस ट्रेन के हर तकनीकी पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। पिछले सप्ताह हुए ट्रायल में ट्रेन ने शानदार प्रदर्शन किया था:

  • रफ़्तार: 26 फरवरी को ट्रायल के दौरान वापसी में ट्रेन ने 85 किमी/घंटा की रफ़्तार छुई।

  • क्षमता: अब आगामी दिनों में इस रूट पर प्रतिदिन दो से तीन चक्कर लगाए जाने की योजना है, ताकि उद्घाटन से पहले इसकी स्थिरता (Stability) जांची जा सके।

  • मेंटेनेंस: हाल ही में दिल्ली के शकूरबस्ती में इसका विशेष मेंटेनेंस चेक पूरा हुआ है, जिसके बाद इसे वापस जींद लाया गया है।

🌿 ‘नमो ग्रीन रेल’ क्यों है भारत के लिए खास?

चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार की गई इस ट्रेन को ‘नमो ग्रीन रेल’ नाम दिया गया है। यह केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी क्रांति है:

  1. जीरो प्रदूषण: डीजल इंजन के विपरीत, यह ट्रेन चलने पर धुएं के बजाय केवल जलवाष्प (Water Vapor) छोड़ती है।

  2. ध्वनि प्रदूषण से राहत: हाइड्रोजन इंजन पारंपरिक इंजनों की तुलना में बहुत शांत होते हैं, जिससे यात्रियों को एक प्रीमियम अनुभव मिलता है।

  3. ग्रीन फ्यूल सेल: इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल का उपयोग किया गया है जो ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के मिश्रण से बिजली पैदा करता है।

⚠️ रविवार को आई बाधा और तकनीकी चुनौतियां

यद्यपि ट्रायल की तैयारी रविवार से ही थी, लेकिन तकनीकी कारणों से एक इंजन में हाइड्रोजन गैस नहीं भरी जा सकी। रेलवे अब सुरक्षा और ईंधन भरने की प्रक्रिया पर विशेष सतर्कता बरत रहा है। हाइड्रोजन एक अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, इसलिए इसके फिलिंग स्टेशन और स्टोरेज को लेकर रेलवे कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।

📍 जींद-सोनीपत रूट पर ट्रायल का शेड्यूल

जानकारी के अनुसार, शुरुआती चरण में ट्रेन को पांडू पिंडारा से ललित खेड़ा के बीच सफलतापूर्वक चलाया गया। अब इसे गोहाना और मुहाना के आगे तक ले जाने की तैयारी है। वर्तमान में ट्रायल के दौरान इसकी रफ़्तार 60 से 85 किमी/घंटा के बीच रखी जा रही है, जिसे भविष्य में और बढ़ाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है: “यदि जींद-सोनीपत रूट पर यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहता है, तो देश के अन्य पहाड़ी और संकरे रेल मार्गों (जैसे कालका-शिमला) पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जाएंगी।”

📅 कब होगा उद्घाटन?

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सभी तकनीकी मापदंडों पर खरा उतरने के बाद जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ‘ग्रीन ट्रेन’ को हरी झंडी दिखा सकते हैं। फिलहाल, जींद-सोनीपत ट्रैक पर इसके ट्रायल रन को देखना स्थानीय लोगों के लिए किसी कौतूहल से कम नहीं है।

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