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Nobel Peace Prize Controversy: मचाडो-ट्रंप मुलाकात और नोबेल पुरस्कार का हस्तांतरण, वेनेजुएला संकट पर विशेष रिपोर्ट

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वाशिंगटन. जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने कूटनीति और पुरस्कारों के इतिहास में नया विवाद और रोमांच पैदा कर दिया है। वेनेजुएला की विपक्षी नेता और 2025 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना मूल नोबेल मेडल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भेंट कर दिया है।

यह कदम न केवल एक व्यक्तिगत उपहार है, बल्कि वेनेजुएला के भविष्य को लेकर की गई एक बड़ी कूटनीतिक चाल (Diplomatic Gambit) मानी जा रही है।

🎖️ कूटनीतिक हलचल: क्या है पूरा मामला?

15 जनवरी 2026 को व्हाइट हाउस में हुई एक निजी मुलाकात के दौरान मचाडो ने यह मेडल ट्रंप को सौंपा।

  • ऐतिहासिक संदर्भ: मचाडो ने इस भेंट की तुलना 200 साल पहले के उस प्रसंग से की जब जनरल लाफायेट (Marquis de Lafayette) ने दक्षिण अमेरिकी स्वतंत्रता नायक सिमोन बोलिवर को जॉर्ज वॉशिंगटन के चेहरे वाला मेडल दिया था। उन्होंने कहा, “आज बोलिवर के लोग वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी को हमारी आजादी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के सम्मान में यह मेडल लौटा रहे हैं।”

  • ट्रंप की प्रतिक्रिया: डोनाल्ड ट्रंप, जो लंबे समय से नोबेल पुरस्कार की इच्छा सार्वजनिक रूप से जताते रहे हैं, ने इसे “आपसी सम्मान का अद्भुत संकेत” बताया। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मारिया ने मेरे काम के लिए अपना नोबेल मुझे दिया है, यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है।”

  • मौजूदा स्थिति: अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने के बाद वहां की राजनीति अनिश्चित है। विश्लेषकों का मानना है कि मचाडो ने यह मेडल देकर ट्रंप का समर्थन हासिल करने की कोशिश की है, क्योंकि ट्रंप ने हाल ही में उनके बजाय मादुरो की पूर्व डिप्टी डेल्सी रोड्रिगेज के साथ काम करने के संकेत दिए थे।

⚖️ क्या नोबेल प्राइज ट्रांसफर हो सकता है?

मचाडो के इस कदम पर ओस्लो स्थित नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी किया है:

  • नियम: नोबेल फाउंडेशन के नियमों के अनुसार, नोबेल पुरस्कार न तो ट्रांसफर किया जा सकता है, न साझा किया जा सकता है और न ही इसे रद्द किया जा सकता है।

  • निष्कर्ष: भले ही ट्रंप शारीरिक रूप से उस स्वर्ण पदक (Medal) को अपने पास रखें, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में मारिया कोरिना मचाडो ही 2025 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता रहेंगी।

यह भी पढ़ें : 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में RSS की भागीदारी: नेहरू के निमंत्रण की पूरी कहानी

🔍 निवेश और कूटनीतिक प्रभाव (SEO Table)

क्षेत्र प्रभाव
भू-राजनीति अमेरिका का वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों (Oil Fields) पर नियंत्रण बढ़ सकता है।
कूटनीति ‘पुरस्कारों की राजनीति’ का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
वेनेजुएला मचाडो की इस ‘Flattery’ (चापलूसी/सम्मान) रणनीति से उन्हें सत्ता मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

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