जम्मू. सीमा पार से जारी आतंकवाद, घुसपैठ और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे चौतरफा हमलों का सामना कर रही जम्मू-कश्मीर पुलिस (JKP) अब एक नए अवतार में नजर आएगी। गृह मंत्रालय (MHA) के बड़े बजट और अत्याधुनिक तकनीक के साथ, पुलिस विभाग ने खुद को ‘फ्यूचर-रेडी’ बनाने के लिए कमर कस ली है। साल 2026 को ‘ईयर ऑफ पुलिस टेक्नोलॉजी’ (Year of Police Technology) घोषित करते हुए विभाग ने जवानों की सुरक्षा और ऑपरेशनल क्षमता को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।
1. जवानों के लिए ‘अभेद्य’ सुरक्षा कवच: B5 और B6 लेवल जैकेट
दुश्मन की गोलियां अब जवानों का रास्ता नहीं रोक सकेंगी। पुलिस विभाग ने 8,000 से अधिक अत्याधुनिक बुलेट प्रूफ जैकेटों की खेप तैनात की है:
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B5 लेवल जैकेट (7,416 यूनिट): ये जैकेट एके-47 जैसी घातक राइफलों की सीधी गोलियों को रोकने में सक्षम हैं।
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B6 लेवल जैकेट (784 यूनिट): ये विशेष जैकेट अत्यधिक शक्तिशाली हथियारों और स्नाइपर शॉट्स से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
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लेवल V की नई खरीद: हालिया 2026 के अपडेट के अनुसार, 2,580 अतिरिक्त BIS लेवल V जैकेटों की खरीद प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है, जो वजन में हल्की और सुरक्षा में कहीं अधिक प्रभावी हैं।
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2. बुलेट प्रूफ बेड़ा: कठिन रास्तों पर सुरक्षित मूवमेंट
आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों की गतिशीलता बढ़ाने के लिए वाहनों को भी अपग्रेड किया गया है।
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B1 से B3 क्षमता के 72 वाहन: पुलिस ने अलग-अलग बैलिस्टिक क्षमताओं वाले 72 नए बुलेट प्रूफ वाहन शामिल किए हैं।
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एंटी-माइन गाड़ियाँ: हाल ही में शामिल किए गए 12 डीप सर्च माइन डिटेक्टर्स और सुरक्षित वाहनों के कारण अब आईईडी (IED) के खतरों के बीच भी जवान तेजी से मूव कर सकेंगे।
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3. ‘AI Security Grid’ और ड्रोन से आसमान में पहरा
जम्मू-कश्मीर पुलिस अब केवल जमीन पर नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया और आसमान में भी आतंकियों को ट्रैक कर रही है।
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45 मिनी ड्रोन: ये ड्रोन घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों में छिपे आतंकियों की सटीक लोकेशन बताएंगे।
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AI-Enabled Security Grid: साल 2026 की शुरुआत के साथ ही पुलिस ने Artificial Intelligence आधारित सुरक्षा ग्रिड लॉन्च किया है। इसमें 100 अल्ट्रा वाइड CCTV कैमरों के साथ ‘फेशियल रिकग्निशन’ (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) को जोड़ा गया है।
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स्मार्ट सर्विलांस: श्रीनगर जैसे मुख्य शहरों में 300 से अधिक हाई-टेक कैमरे संदिग्धों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग कर रहे हैं।
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4. मॉडर्न वेपन्स: तावोर और कॉर्नर-शॉट पिस्तौल
हथियारों के मामले में भी पुलिस को विश्वस्तरीय बनाया गया है। जवानों को अब इजरायली तावोर (Tavor X95), भारत निर्मित ‘शूट-एज’ कॉर्नर शॉट पिस्तौल और जर्मन MP-5 राइफलें दी जा रही हैं। ये हथियार घनी आबादी वाले इलाकों (CQC) में बिना खुद को खतरे में डाले आतंकियों को ढेर करने की ताकत देते हैं।
क्यों जरूरी था यह आधुनिकीकरण?
अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति और पड़ोसी देश की हाइब्रिड वॉरफेयर रणनीति के कारण पुरानी तकनीक नाकाफी साबित हो रही थी। गृह मंत्रालय ने साल 2025-26 के लिए पुलिस आधुनिकीकरण योजना (ASUMP) के तहत करोड़ों का फंड जारी किया है।
DGP का संदेश: “आधुनिक संसाधनों से न केवल आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन सटीक होंगे, बल्कि हमारे जवानों का मनोबल भी ऊंचा रहेगा। अब हम तकनीक के मामले में किसी भी ग्लोबल फोर्स से पीछे नहीं हैं।”
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