नई दिल्ली. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) की कानूनी वैधता को लेकर चल रहा लंबा इंतज़ार अब समाप्त होने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस कानून और इसके तहत बनाए गए नियमों को चुनौती देने वाली 250 से अधिक याचिकाओं पर 5 मई, 2026 से अंतिम सुनवाई शुरू करेगा।
सुनवाई का मास्टर प्लान
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने इस जटिल मामले को सुलझाने के लिए एक कड़ा शेड्यूल तैयार किया है:
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मैराथन सुनवाई: कोर्ट 5, 6 और 7 मई को लगातार दलीलें सुनेगा।
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पक्षों का समय: शुरुआती डेढ़ दिन याचिकाकर्ताओं के लिए और अगला डेढ़ दिन केंद्र सरकार के जवाब के लिए सुरक्षित रखा गया है।
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अंतिम निर्णय की ओर: 12 मई को ‘प्रत्युत्तर दलीलों’ (Rejoinder) के साथ बहस का समापन होगा।
दो चरणों में होगी प्रक्रिया
अदालत ने याचिकाओं की भारी संख्या को देखते हुए उन्हें दो श्रेणियों में विभाजित किया है:
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पैन-इंडिया मुद्दे: पहले उन याचिकाओं पर गौर किया जाएगा जो पूरे देश में धर्म के आधार पर नागरिकता देने के प्रावधानों को चुनौती देती हैं।
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असम और त्रिपुरा: इसके बाद उन विशेष याचिकाओं की सुनवाई होगी जो असम समझौते और उत्तर-पूर्वी राज्यों की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हैं।
महत्वपूर्ण पक्ष: याचिकाकर्ताओं में मुख्य रूप से IUML, केरल सरकार, असददुद्दीन ओवैसी (AIMIM) और जयराम रमेश (कांग्रेस) शामिल हैं। इनका तर्क है कि कानून का आधार ‘धार्मिक भेदभाव’ है, जो संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है।
कोर्ट का निर्देश
पीठ ने सभी नोडल वकीलों को निर्देश दिया है कि वे 5 मई से पहले सभी दस्तावेजों का संकलन (Compilation) पूरा कर लें ताकि सुनवाई के दौरान समय का नुकसान न हो। केंद्र सरकार ने पहले ही अपने हलफनामे में कानून को पूरी तरह संवैधानिक और नीतिगत निर्णय बताया है।
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