मुंबई। सोमवार, 20 अप्रैल 2026
महाराष्ट्र के नागपुर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ बच्चों के लिए काम करने का दावा करने वाले एक NGO के चेयरमैन को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किया गया है।
मुख्य घटनाक्रम: जन्मदिन की पार्टी से शुरू हुआ शोषण का सिलसिला
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की मुख्य शिकायतकर्ता NGO की 23 वर्षीय HR हेड है। उसने आरोप लगाया कि शोषण की शुरुआत जुलाई 2024 में उसके जन्मदिन के दौरान हुई। पीड़िता के मुताबिक:
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आरोपी रियाज फाजिल काजी ने उसे केबिन में बुलाकर उसकी मर्जी के खिलाफ शारीरिक स्पर्श किया और अभद्र टिप्पणी की।
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नौकरी खोने के डर से पीड़िता शुरुआत में चुप रही, जिसका फायदा उठाकर आरोपी लगातार छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न करता रहा।
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साजिश के तहत आरोपी ऑफिस के CCTV कैमरे बंद कर देता था ताकि कोई सबूत न रहे।
धर्मांतरण और धार्मिक प्रथाओं का दबाव
मामले में तब और गंभीर मोड़ आया जब पीड़िता की बड़ी बहन ने भी अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि जब उसने NGO जॉइन किया, तो उसे नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। साथ ही:
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महिला कर्मचारियों को खास तरह के कपड़े पहनने का निर्देश दिया जाता था।
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इस्लामिक रीति-रिवाजों को अपनाने के लिए उन पर मानसिक दबाव बनाया गया।
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विरोध करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती थी।
गाली-गलौज और वेश्यावृत्ति के झूठे आरोप
शिकायत में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी ने पीड़िता की माँ को फोन करके पीड़िता और उसकी महिला सहयोगियों के लिए ‘वेश्या’ और ‘कॉल गर्ल’ जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। आरोपी ने कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट भी बनाया था।
पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
मामला तब सुर्खियों में आया जब 18 अप्रैल को शिकायतकर्ता और अन्य महिलाएं NGO कार्यालय पहुंचीं और वहां ताला लटका मिला। इसके बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए आरोपी को दबोच लिया।
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जांच के बिंदु: पुलिस अब आरोपी के कॉल रिकॉर्ड्स, सोशल मीडिया एक्टिविटी और डिलीट किए गए CCTV फुटेज को रिकवर करने में जुटी है।
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फंडिंग की जांच: NGO को मिलने वाले फंड और उसके असली उद्देश्यों की भी गहनता से जांच की जा रही है।
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न्यायिक हिरासत: आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।
“इस मामले में कई महिलाएं शिकायत लेकर सामने आ रही हैं। हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं, चाहे वह यौन उत्पीड़न हो या जबरन धार्मिक प्रथाएं थोपना। कानून के मुताबिक कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
— वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, नागपुर
निष्कर्ष: यह घटना कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े करती है। शहर के विभिन्न संगठनों ने आरोपी के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने की मांग की है।
Matribhumisamachar


