इस्लामाबाद । सोमवार, 20 अप्रैल 2026
जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ जारी जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। लश्कर-ए-तैयबा का कुख्यात कमांडर हबीबुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट, जो कभी कुलगाम की गलियों में ‘सलीम लंगड़ा’ के नाम से जाना जाता था, आज पाकिस्तान में बैठकर घाटी में निर्दोषों के खून की पटकथा लिख रहा है। हालिया फॉरेंसिक रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले के पीछे इसी ‘डिजिटल हैंडलर’ का हाथ था।
सलीम लंगड़ा से ‘साजिद जट्ट’ बनने का सफर
हबीबुल्लाह का जन्म 3 सितंबर 1982 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर जिले में हुआ था। साल 2005 में वह घुसपैठ कर कुलगाम पहुंचा, जहाँ उसने अपनी पहचान सलीम उर्फ सैफुल्लाह के रूप में बताई। एक पैर से दिव्यांग होने के कारण वह नकली टांग के सहारे चलता था, जिससे उसे स्थानीय स्तर पर ‘सलीम लंगड़ा’ कहा जाने लगा।
आतंकी गतिविधियों के बीच उसने कुलगाम के यारीपोरा की एक महिला, शब्बीरा कुच्चे से निकाह किया और वहीं अपना बेस बनाया। हालांकि, 2007 में दबाव बढ़ने पर वह अपनी पत्नी और एक साल के बेटे उमर को छोड़कर पाकिस्तान भाग गया।
लखवी का करीबी और कश्मीर का ‘प्रमुख’
पाकिस्तान पहुंचकर हबीबुल्लाह ने कुछ समय दूध की डेयरी चलाई, लेकिन लश्कर के मरकज़ यरमूक में आतंकियों को ट्रेनिंग देना जारी रखा। उसकी वफादारी को देखते हुए 2012 में लश्कर के टॉप कमांडर ज़की-उर-रहमान लखवी ने उसे पूरे जम्मू-कश्मीर का प्रमुख नियुक्त कर दिया। इसके बाद उसने अपना नया नाम ‘साजिद जट्ट’ रखा और रिमोट कंट्रोल के जरिए घाटी में हमले शुरू करवाए।
आतंकी हमलों का खूनी इतिहास
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2013: हैदरपोरा में भारतीय सेना पर बड़ा हमला।
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टारगेट किलिंग: घाटी में भाजपा नेताओं और गैर-कश्मीरी मजदूरों की हत्याएं।
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9 जून 2024: रियासी में शिव खोरी जा रहे हिंदू श्रद्धालुओं की बस पर अंधाधुंध फायरिंग, जिसमें 9 लोगों की मौत हुई।
डिजिटल साक्ष्यों ने खोली पोल: व्हाट्सएप और अल्पाइन क्वेस्ट का खेल
15 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले के बाद मारे गए आतंकियों (बिलाल अफजल, हबीब ताहिर और हनन जफर) के पास से बरामद मोबाइल फोन ने हबीबुल्लाह के सीधे कनेक्शन की पुष्टि कर दी है।
सेंट्रल फॉरेंसिक लेबोरेटरी (CFSL) की जांच में पाया गया कि हमले से एक दिन पहले हबीबुल्लाह ने पाकिस्तान से व्हाट्सएप पर बैसरन घाटी के सटीक लोकेशन कॉर्डिनेट्स भेजे थे। आतंकियों ने इन कॉर्डिनेट्स के स्क्रीनशॉट लिए और उन्हें ‘अल्पाइन क्वेस्ट ऐप’ (Alpine Quest App) में सेव किया था, ताकि घने जंगलों में भी वे रास्ता न भटकें।
सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नजर
जांच अधिकारियों का कहना है कि हबीबुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट का मामला यह साबित करता है कि कैसे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स हाइब्रिड वॉरफेयर और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब उसके स्थानीय नेटवर्क और उन मददगारों की तलाश कर रही हैं जिन्होंने उसे सालों तक कुलगाम में पनाह दी थी।
Matribhumisamachar


