नई दिल्ली । बुधवार, 20 मई 2026
भारतीय राजनीति में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जब धुर विरोधी दल भी राष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर एक साथ खड़े नजर आते हैं। ऐसा ही कुछ इस बार भी देखने को मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा पांच दिवसीय विदेश दौरे (15 से 20 मई) को लेकर जहाँ पूरी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक और वरिष्ठ राजनेता शरद पवार ने एक बेहद परिपक्व और अलग रुख अपनाया है।
मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए शरद पवार ने स्पष्ट किया कि जब बात देश के सम्मान और वैश्विक प्रतिष्ठा की हो, तो घरेलू राजनीति और मतभेदों को पीछे छोड़ देना चाहिए।
‘देश की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं प्रधानमंत्री’ – शरद पवार
शरद पवार ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं और लोकतंत्र में विरोध लाजमी है, लेकिन वैश्विक पटल पर भारत की स्थिति को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा:
“हमारे राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन जब बात देश के सम्मान की हो, तब राजनीतिक मतभेदों को बीच में नहीं लाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने का काम कर रहे हैं और इसमें सभी दलों को एकजुट होना चाहिए।”
पवार ने भारत के गौरवशाली राजनीतिक इतिहास की याद दिलाते हुए पूर्व प्रधानमंत्रियों—श्रीमती इंदिरा गांधी, पीवी नरसिंह राव और डॉ. मनमोहन सिंह का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इन महान नेताओं ने भी अपनी विदेश नीतियों और कूटनीति में हमेशा देश के भविष्य और सम्मान को सर्वोपरि रखा था।
राहुल गांधी और संजय राउत के कड़े तेवर
पवार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष के अन्य प्रमुख नेता इस दौरे को लेकर केंद्र सरकार को घेर रहे हैं।
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राहुल गांधी का सवाल: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी की इस यात्रा पर तंज कसते हुए कहा था कि एक तरफ प्रधानमंत्री देश की जनता से अनावश्यक विदेशी दौरों को कम करने और ईंधन बचाने की अपील करते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे खुद लगातार विदेशी दौरों पर जा रहे हैं।
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संजय राउत का कटाक्ष: शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने भी पीएम के विदेशी दौरों की टाइमिंग और वहां मिलने वाले सम्मानों को लेकर राजनीतिक चुटकी ली थी।
क्या हैं इस कूटनीतिक यात्रा के मायने? (विश्लेषण)
राजनीतिक बयानों से इतर, इस यात्रा का वैश्विक और रणनीतिक महत्व काफी अधिक है। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह कूटनीतिक मिशन भारत के भविष्य के लिए बेहद अहम है।
प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं। इस यात्रा के तीन सबसे मुख्य स्तंभ हैं:
| कूटनीतिक क्षेत्र | मुख्य उद्देश्य | भारत को लाभ |
| ऊर्जा सुरक्षा (Energy) | यूएई के साथ रणनीतिक तेल भंडारों और नवीकरणीय ऊर्जा पर बात। | कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और सुरक्षित आपूर्ति। |
| ग्रीन टेक व पर्यावरण | नीदरलैंड और नॉर्डिक देशों (स्वीडन, नॉर्वे) के साथ ग्रीन हाइड्रोजन पर सहयोग। | भारत के नेट-जीरो कार्बन लक्ष्यों को हासिल करने में गति। |
| रक्षा व तकनीक | इटली और स्वीडन के साथ रक्षा मैन्युफैक्चरिंग तथा आधुनिक तकनीकों का आदान-प्रदान। | ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता। |
राजनीतिक संदेश
शरद पवार का यह बयान यह साबित करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रगति और वैश्विक मंच पर भारत की साख ऐसे मुद्दे हैं, जहाँ भारतीय राजनीति की परिपक्वता झलकती है। पवार का यह रुख आने वाले दिनों में विपक्षी गठबंधन के भीतर आंतरिक कूटनीति और चर्चाओं का एक नया दौर शुरू कर सकता है।
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