कोलकाता । बुधवार, 20 मई 2026
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में 5 जनवरी 2024 को राशन घोटाले की जाँच करने पहुँची प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पर हुए हिंसक हमले के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। राज्य पुलिस की स्पेशल टीम और स्थानीय इंटेलिजेंस ने मिलकर सत्तारूढ़ दल तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की दो बेहद रसूखदार महिला नेताओं को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार की गई दोनों नेताओं के संबंध इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य मास्टरमाइंड शेख शाहजहाँ के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। आइए इस मामले की पूरी तह, नवीनतम अपडेट और महत्वपूर्ण सुधारों (corrections) को विस्तार से समझते हैं।
1. गिरफ्तार महिला नेताओं की पहचान और राजनीतिक रसूख
पुलिस की संयुक्त छापेमारी में जिन दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है, वे संदेशखाली के स्थानीय प्रशासन और पार्टी संगठन में मजबूत पकड़ रखती हैं:
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सबीता रॉय: सबीता रॉय बेसिरहाट संगठनात्मक जिला TMC महिला विंग की अध्यक्ष हैं। इसके साथ ही वे सन्देशखाली-1 पंचायत समिति की चेयरपर्सन के पद पर भी कार्यरत हैं।
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मिथु सरदार: मिथु सरदार सन्देशखाली-1 ब्लॉक TMC की अध्यक्ष हैं और इसी पंचायत समिति में एक कार्यकारी (Executive) पद की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
जाँच का बिंदु: पुलिस का मानना है कि इन दोनों नेताओं के पास न केवल प्रशासनिक ताकत थी, बल्कि संदेशखाली के ग्रामीण इलाकों में लोगों को एक इशारे पर इकट्ठा करने की संगठनात्मक क्षमता भी थी, जिसका इस्तेमाल 5 जनवरी की घटना में किया गया।
2. ‘ऑपरेशन सोनारपुर’: मोबाइल ट्रैकिंग से देर रात गिरफ्तारी
जाँच एजेंसियों और स्थानीय पुलिस द्वारा जब संदेशखाली इलाके में सख्त छापेमारी और धरपकड़ शुरू की गई, तो दोनों महिला नेता गिरफ्तारी के डर से अपना इलाका छोड़कर भाग निकली थीं।
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खुफिया जाल: नजत पुलिस स्टेशन की टीम और स्थानीय इंटेलिजेंस विंग ने लगातार उनके मोबाइल फोन सिग्नलों की निगरानी की।
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लोकेशन ट्रैकिंग: मोबाइल टावर लोकेशन ट्रैकिंग और जमीन पर सक्रिय मुखबिरों (Local Intelligence) से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस को उनके दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर/नरेंद्रपुर इलाके में छिपे होने की सटीक जानकारी मिली।
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सफल छापेमारी: देर रात पुलिस की संयुक्त टीम ने नरेंद्रपुर के एक ठिकाने पर घेराबंदी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
ताजा अपडेट: पुलिस इन दोनों आरोपितों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बसीरहाट सब-डिविजिनल कोर्ट में पेश करने जा रही है, जहाँ पुलिस उनकी कस्टडी (रिमांड) की माँग करेगी ताकि हमले की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जा सके।
3. मुख्य आरोप: भीड़ जुटाना और सुनियोजित साजिश
जाँच एजेंसियों (ED और पुलिस) का स्पष्ट मानना है कि 5 जनवरी 2024 को शेख शाहजहाँ के घर के बाहर जो कुछ भी हुआ, वह कोई अचानक भड़की हुई भीड़ का गुस्सा नहीं था, बल्कि वह एक पूर्व-नियोजित (Pre-planned) साजिश थी।
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छापेमारी रोकने का प्रयास: राशन घोटाले के मुख्य आरोपित शेख शाहजहाँ के आवास पर केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ पहुँचे ED अधिकारियों को रोकने के लिए भारी संख्या में भीड़ जुटाई गई थी।
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नारेबाजी और हिंसा: भीड़ ने न केवल अधिकारियों पर पत्थरों और लाठियों से जानलेवा हमला किया (जिसमें कई अधिकारी घायल हुए), बल्कि शाहजहाँ के समर्थन में नारे भी लगाए।
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नेताओं की भूमिका: सबीता रॉय और मिथु सरदार पर आरोप है कि उन्होंने पर्दे के पीछे से स्थानीय लोगों और उपद्रवियों को उकसाया, उन्हें गाड़ियाँ या माध्यम उपलब्ध कराए और मौके पर भीड़ जुटाने में सीधे तौर पर मदद की।
4. अतीत का रिकॉर्ड
इस मामले की गहराई में जाने पर इन दोनों नेताओं का पुराना रिकॉर्ड भी सामने आया है, जिसे लेकर जाँच एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं:
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2021 की चुनावी हिंसा: गिरफ्तार की गई दोनों महिला नेताओं पर केवल ED हमले की साजिश का ही आरोप नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा और संदेशखाली इलाके में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के मामलों में भी इनकी भूमिका संदिग्ध रही है और पुराने मामले दर्ज हैं।
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तथ्यों में सुधार (Clarification): शुरुआत में स्थानीय स्तर पर यह भ्रम था कि यह कार्रवाई केवल स्थानीय पुलिस के स्तर पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई है। लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि यह केंद्रीय एजेंसियों की जाँच के इनपुट और राशन घोटाले की कड़ियों को जोड़ने के बाद की गई एक बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई है, जो सीधे तौर पर शेख शाहजहाँ के वित्तीय और बाहुबल नेटवर्क को ध्वस्त करने से जुड़ी है।
निष्कर्ष और आगे की राह
संदेशखाली का यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून-व्यवस्था के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहा है। टीएमसी की इन दो ब्लॉक और जिला स्तरीय महिला नेताओं की गिरफ्तारी से शेख शाहजहाँ के स्थानीय तंत्र को एक बड़ा झटका लगा है। कोर्ट से रिमांड मिलने के बाद पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां यह जानने की कोशिश करेंगी कि हमले के दौरान इस्तेमाल किए गए फोन कॉल्स और संदेशों के तार कोलकाता या पार्टी के किन अन्य बड़े नेताओं से जुड़े थे।
Matribhumisamachar


