हैदराबाद । गुरुवार, 21 मई 2026
हैदराबाद की एक विशेष अदालत ने समाज को झकझोर देने वाले बाल यौन उत्पीड़न के एक मामले में ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 11 साल के एक मासूम बच्चे के साथ हुई दरिंदगी पर सख्त रुख अपनाते हुए 23 वर्षीय ऑटो चालक अब्दुल रहमान को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने अपराधी को 20 साल के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ ऐसे हिंसक और घिनौने कृत्य करने वालों के लिए समाज और कानून में कोई जगह नहीं है।
आर्थिक जुर्माना और पीड़ित को मुआवजा
कठोर कारावास की सजा के साथ-साथ अदालत ने दोषी अब्दुल रहमान पर 6,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। इसके अतिरिक्त, अदालत ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित बच्चे के पुनर्वास और मानसिक संबल के लिए 75,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।
क्या था पूरा मामला? (घटनाक्रम पर एक नजर)
यह दर्दनाक घटना करीब साढ़े छह साल पुरानी यानी 29 अक्टूबर 2019 की है।
पोक्सो (POCSO) एक्ट ने तय की त्वरित सजा
पुलिस ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत पोक्सो (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। पोक्सो कानून के कड़े प्रावधानों और पुख्ता सबूतों के आधार पर ही आज आरोपी को इतनी सख्त सजा मिल पाई है।
नवीनतम अपडेट (Latest Updates):
कानूनी जानकारों के मुताबिक, बच्चों से जुड़े मामलों में अक्सर गवाहों के मुकर जाने या लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण न्याय में देरी होती है। लेकिन इस मामले में राहगीरों की गवाही और पुलिस की त्वरित चार्जशीट ने अहम भूमिका निभाई। ऐसे मामलों में अदालतों द्वारा दिखाई गई यह सख्ती बाल सुरक्षा को लेकर कानून के डर को मजबूत करती है।
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