लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गई है। अखिलेश यादव ने सार्वजनिक मंचों से केंद्र और राज्य सरकार पर उनकी सुरक्षा के साथ “खिलवाड़” करने का आरोप लगाया है। उनका मुख्य विरोध उनकी NSG (ब्लैक कैट) सुरक्षा को हटाए जाने को लेकर है।
🔐 क्या है अखिलेश यादव का वर्तमान सुरक्षा घेरा?
फरवरी 2026 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अखिलेश यादव को वर्तमान में Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जा रही है। उनके सुरक्षा बेड़े की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
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कुल सुरक्षाकर्मी: उनकी सुरक्षा में कुल 185 जवान तैनात हैं।
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CoBRA कमांडो: इस सुरक्षा कवच में 24 विशेष रूप से प्रशिक्षित CoBRA (Commando Battalion for Resolute Action) कमांडो शामिल किए गए हैं, जो अपनी छापामार युद्ध कौशल के लिए जाने जाते हैं।
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तकनीकी दस्ता: सुरक्षा घेरे में एस्कॉर्ट वाहन, पायलट गाड़ी, एंटी-सबोटाज चेकिंग टीम और क्लोज प्रोटेक्शन यूनिट (CPU) की तैनाती सुनिश्चित की गई है।
सरकारी सूत्रों का दावा है कि यह सुरक्षा स्तर राज्य के अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है।
🏛️ सरकार का स्पष्टीकरण: NSG बनाम Z+
विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सदन में स्पष्ट किया कि सुरक्षा में कोई कटौती नहीं की गई है। सरकार के मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:
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अधिकार क्षेत्र: राज्य सरकार ने साफ किया कि NSG सुरक्षा प्रदान करना पूरी तरह से केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन है।
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प्रोटोकॉल का पालन: वर्तमान में दी जा रही Z+ सुरक्षा सभी निर्धारित राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुरूप है।
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तुलनात्मक सुरक्षा: सरकार के अनुसार, 185 कर्मियों का जत्था किसी भी उच्च-स्तरीय खतरे से निपटने में सक्षम है।
📜 NSG सुरक्षा का इतिहास और विवाद
अखिलेश यादव की NSG सुरक्षा का मामला साल 2012 से शुरू होता है:
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2012: मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें पहली बार ‘ब्लैक कैट’ कमांडो का सुरक्षा घेरा मिला था।
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2019: केंद्र सरकार की सुरक्षा समीक्षा (Security Review) के बाद उनकी NSG सुरक्षा वापस ले ली गई थी।
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अक्टूबर 2025: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अखिलेश यादव की NSG बहाली की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सुरक्षा व्यवस्था कार्यपालिका का विषय है, इसमें न्यायपालिका का हस्तक्षेप उचित नहीं।
🗣️ राहुल गांधी का हवाला और “दोहरे मानक” के आरोप
फरवरी 2026 के हालिया बयानों में अखिलेश यादव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सुरक्षा का उदाहरण देते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि अन्य विपक्षी नेताओं को विशिष्ट सुरक्षा मिल सकती है, तो उनके लिए अलग मानक क्यों अपनाए जा रहे हैं? सपा प्रमुख ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के संकेत दिए हैं।
🧭 विश्लेषण: सुरक्षा या सियासी संदेश?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी सरगर्मियों के बीच यह मुद्दा “विपक्ष बनाम सरकार” की जंग का हिस्सा बन गया है।
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खतरे का आकलन (Threat Perception): सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सुरक्षा का स्तर किसी नेता के पद या लोकप्रियता से नहीं, बल्कि खुफिया विभाग की ‘खतरे की रिपोर्ट’ के आधार पर तय होता है।
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सियासी प्रभाव: सपा इस मुद्दे के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए उनकी सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है।
🔎 निष्कर्ष
फिलहाल अखिलेश यादव 185 जवानों के Z+ सुरक्षा घेरे में हैं, लेकिन NSG (ब्लैक कैट) की मांग ने यूपी की राजनीति में गर्मी पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि क्या केंद्र सरकार आगामी समीक्षा बैठक में उनके सुरक्षा स्तर में कोई बदलाव करती है या नहीं।
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