पटना । बुधवार, 22 अप्रैल, 2026
बिहार की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। माता जानकी की पावन जन्मस्थली, पुनौरा धाम, अब उसी भव्यता और आधुनिकता के साथ आकार लेगी जैसी अयोध्या में प्रभु श्री राम की जन्मभूमि को मिली है। ₹888 करोड़ की लागत से शुरू हुए इस मेगा प्रोजेक्ट ने अब जमीन पर रफ्तार पकड़ ली है, जिससे न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को नया आयाम मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर भी बदल जाएगी।
🏛️ प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं और हालिया प्रगति
बिहार सरकार द्वारा अनुमोदित इस परियोजना के तहत पुनौरा धाम को 67 एकड़ के विशाल क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। हाल ही में परियोजना के पहले पिलर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है, जिसे मंदिर निर्माण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण औपचारिक कदम माना जा रहा है।
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निर्माण एजेंसी: इस भव्य कार्य की कमान Ahluwalia Contracts (India) Ltd को सौंपी गई है। कंपनी को यह प्रोजेक्ट EPC (Engineering, Procurement, and Construction) मोड में मिला है, जिसके लिए 42 महीनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
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बजट विस्तार: कुल स्वीकृत बजट ₹888.38 करोड़ (GST सहित) है, जिसका उपयोग मंदिर निर्माण के साथ-साथ पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाएगा।
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अधिग्रहण और सीमांकन: प्रोजेक्ट के पहले चरण में लगभग 50 एकड़ अतिरिक्त भूमि का मापी और सीमांकन कार्य पूरा हो चुका है, जिससे काम में तेजी आई है।
✨ क्या होगा खास इस विश्वस्तरीय धाम में?
पुनौरा धाम को केवल एक मंदिर के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘धार्मिक क्लस्टर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है:
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भव्य जानकी मंदिर: अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर पत्थर और नक्काशीदार वास्तुकला से निर्मित मंदिर।
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सीता सरोवर: मंदिर परिसर स्थित पवित्र सरोवर का कायाकल्प और आधुनिक घाटों का निर्माण।
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डिजिटल गैलरी व प्रदर्शनी: मां सीता के जीवन और रामायण काल को दर्शाती आधुनिक प्रदर्शनी और ध्यान केंद्र (Meditation Centre)।
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श्रद्धालु सुविधाएं: विश्वस्तरीय होटल, गेस्ट हाउस, पार्क और चौड़ी सड़कों का नेटवर्क ताकि पर्यटकों को कोई असुविधा न हो।
📈 बिहार के विकास को मिलेगी नई उड़ान
विशेषज्ञों का मानना है कि रामायण सर्किट के तहत अयोध्या-जनकपुर-सीतामढ़ी के जुड़ने से बिहार में धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर हजारों रोजगार पैदा होंगे और सीतामढ़ी जिला वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।
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