देहरादून । बुधवार, 22 अप्रैल, 2026
उत्तराखंड की देवभूमि में अवैध अतिक्रमण और कथित ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार का अभियान अपनी पूरी रफ्तार में है। इसी कड़ी में बुधवार सुबह हरिद्वार के सुमन नगर क्षेत्र में प्रशासन का बुलडोजर गरजा, जहाँ सिंचाई विभाग की बेशकीमती भूमि पर अवैध रूप से निर्मित एक मजार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
मुख्य बिंदु: प्रशासन की तैयारी और कार्रवाई
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई थी। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के अनुसार, विभाग ने करीब एक माह पहले मजार प्रबंधन को नोटिस थमाया था। उनसे भूमि के मालिकाना हक और निर्माण से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था।
निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी जब प्रबंधन कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सका, तब प्रशासन ने बुधवार सुबह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की।
शांतिपूर्ण रहा अभियान
हैरानी की बात यह रही कि कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार का विरोध देखने को नहीं मिला। प्रशासन द्वारा पूर्व में दी गई चेतावनी के कारण, मजार के खादिमों ने बुलडोजर पहुँचने से पहले ही अपना धार्मिक और व्यक्तिगत सामान वहां से हटा लिया था। अधिकारियों ने बताया कि पूरी विधिक प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही ढांचे को गिराया गया है।
उत्तराखंड सरकार की अतिक्रमण पर बड़ी कार्रवाई
धामी सरकार का सख्त रुख
मुख्यमंत्री धामी कई मौकों पर सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि उत्तराखंड में अवैध धार्मिक अतिक्रमण के लिए कोई जगह नहीं है। सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक:
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अब तक पूरे प्रदेश में 600 से अधिक अवैध मजारों को हटाया जा चुका है।
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वन विभाग और सिंचाई विभाग की सैकड़ों एकड़ भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है।
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सरकारी रिपोर्टों में इसे राज्य की सांस्कृतिक सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य बताया गया है।
डेटा और सांख्यिकी
| विवरण | जानकारी |
| क्षेत्र | सुमन नगर, हरिद्वार |
| विभाग | सिंचाई विभाग (Irrigation Department) |
| नोटिस अवधि | 30 दिन |
| कुल हटाए गए ढांचे | 600+ (संपूर्ण उत्तराखंड में) |
स्पष्टीकरण: कुछ सोशल मीडिया रिपोर्ट्स में इसे बिना नोटिस की कार्रवाई बताया जा रहा था, लेकिन आधिकारिक पुष्टि के अनुसार, प्रबंधन को 30 दिन का पर्याप्त समय दिया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी धर्म विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि केवल ‘अवैध अतिक्रमण’ के विरुद्ध है।
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