नई दिल्ली. भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) 2026 का मसौदा (Draft) जारी कर दिया है। यह नीति 2005 की पुरानी नीति का स्थान लेगी और इसका मुख्य उद्देश्य भारत को ‘विकसित भारत @2047’ के सपने के करीब ले जाना है।भारत अब केवल अंधेरा दूर करने की दहलीज पर नहीं, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बनने की राह पर है। Draft National Electricity Policy (NEP) 2026 इसी दिशा में उठाया गया एक युगांतरकारी कदम है। यह नीति न केवल बिजली आपूर्ति को सुधारेगी, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों और भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धा को भी नई ऊंचाई देगी।
1. विकसित भारत @2047: खपत और क्षमता का लक्ष्य
नीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करना है।
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प्रति व्यक्ति खपत: भारत का लक्ष्य 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत को 2,000 यूनिट (kWh) और 2047 तक 4,000 यूनिट से अधिक तक ले जाना है (जो वर्तमान में लगभग 1,460 यूनिट है)।
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परमाणु ऊर्जा का विस्तार: 2047 तक 100 गीगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
2. उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
नई नीति ‘उपभोक्ता-केंद्रित’ दृष्टिकोण पर आधारित है:
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24×7 गुणवत्तापूर्ण बिजली: सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे विश्वसनीय बिजली देना अब अनिवार्य होगा।
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मुआवजा तंत्र (Compensation): यदि बिजली कंपनियां प्रदर्शन मानकों (SOP) को पूरा नहीं करती हैं, तो उपभोक्ताओं को मुआवजे का अधिकार मिलेगा।
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स्मार्ट मीटरिंग: प्रीपेड बिलिंग और ऑनलाइन शिकायत निवारण को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
3. बिजली की दरों (Tariff) में बड़ा बदलाव
विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) की खराब माली हालत सुधारने के लिए कड़े कदम प्रस्तावित हैं:
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ऑटोमैटिक टैरिफ रिवीजन: यदि राज्य नियामक समय पर बिजली दरों का निर्धारण नहीं करते हैं, तो इंडेक्स-लिंक्ड व्यवस्था के तहत बिजली दरें हर साल अपने आप (Automatically) संशोधित होंगी।
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क्रॉस-सब्सिडी में कमी: औद्योगिक क्षेत्र पर बोझ कम करने के लिए क्रॉस-सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा, जिससे भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
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नकद सब्सिडी: सरकार चाहती है कि सब्सिडी का भुगतान सीधे और अग्रिम (Advance) रूप से किया जाए, न कि बिजली दरों में हेरफेर करके।
4. तकनीक और आत्मनिर्भरता: ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर
नीति का एक मुख्य स्तंभ तकनीकी संप्रभुता है:
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स्वदेशी SCADA प्रणाली: 2030 तक भारत के सभी ग्रिड और डेटा केंद्रों को भारत में विकसित सॉफ्टवेयर और कंट्रोल सिस्टम पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
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साइबर सुरक्षा: बिजली ग्रिड पर बढ़ते विदेशी साइबर हमलों को देखते हुए एक सख्त सुरक्षा ढांचा और डेटा को भारत के भीतर ही स्टोर करने का प्रावधान किया गया है।
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ग्रीन एनर्जी: पुरानी कोयला इकाइयों को ‘ग्रिड सपोर्ट’ के लिए पुनर्निर्मित (Repurposing) किया जाएगा और बैटरी स्टोरेज (BESS) को बढ़ावा दिया जाएगा।
5. वितरण क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा (End of Monopoly)
यह नीति बिजली वितरण के क्षेत्र में ‘एकाधिकार’ (Monopoly) को खत्म करने की बात करती है। सरकार वितरण के क्षेत्र में एक से अधिक कंपनियों को अनुमति देने और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है। इससे उपभोक्ताओं को अपना बिजली प्रदाता चुनने की आजादी मिल सकती है।
ड्राफ्ट NEP 2026 भारत के ऊर्जा क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने का एक ‘ब्लूप्रिंट’ है। यह 2070 के ‘नेट जीरो’ लक्ष्य और 2047 के ‘विकसित भारत’ के विजन को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
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