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पश्चिम बंगाल चुनाव: पहले चरण में भारी मतदान, लेकिन हिंसा और EVM विवाद ने डाला खलल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

कोलकाता । गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान लोकतंत्र के दो रूप देखने को मिले। एक तरफ जहाँ शाम 5 बजे तक लगभग 90% मतदान दर्ज कर जनता ने अपनी जागरूकता का परिचय दिया, वहीं दूसरी ओर बीरभूम और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में हिंसा और ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

बीरभूम के खैराशोल में तनाव और सुरक्षा बलों पर हमला

बीरभूम जिले के खैराशोल ब्लॉक के बुधपुर गांव (बूथ संख्या 65) में स्थिति तब बिगड़ गई जब स्थानीय मतदाताओं ने गंभीर आरोप लगाया। ग्रामीणों का दावा था कि वे ‘तृणमूल कांग्रेस’ (TMC) के चुनाव चिह्न पर बटन दबा रहे थे, लेकिन लाइट ‘भारतीय जनता पार्टी’ (BJP) के सामने जल रही थी।

जैसे ही यह खबर फैली, मतदान केंद्र पर भारी भीड़ जमा हो गई। जब केंद्रीय सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, तो ग्रामीणों के साथ उनकी तीखी बहस हो गई। आक्रोशित भीड़ ने सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू कर दिया और एक वाहन में तोड़फोड़ की। इस झड़प में कुछ जवानों और एक वाहन चालक के घायल होने की खबर है।

चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और तकनीकी सुधार

चुनाव आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बूथ नंबर 65 पर मतदान को अस्थायी रूप से रोक दिया। आयोग के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि ईवीएम में तकनीकी खराबी की शिकायतों की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भेजी गई है। आयोग ने पहले ही संवेदनशील इलाकों में शाम के वक्त तनाव की आशंका जताई थी, जिसे देखते हुए अब अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।

ममता बनर्जी का बयान: “लोकतंत्र की जीत”

हिंसा की खबरों के बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में हुए रिकॉर्ड तोड़ मतदान पर संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत करार देते हुए दावा किया कि भारी वोटिंग प्रतिशत इस बात का संकेत है कि जनता ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर अपना भरोसा बरकरार रखा है।

सुधार और तथ्यात्मक सुधार (Possible Corrections)

सोशल मीडिया पर चल रही कुछ खबरों में दावा किया गया कि कई बूथों पर ईवीएम हैक कर ली गई है। हालाँकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ईवीएम एक स्टैंडअलोन मशीन है जिसे इंटरनेट या ब्लूटूथ से हैक करना असंभव है। तकनीकी खराबी को ‘हैकिंग’ का नाम देना भ्रामक है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।